डीजीसीए और गति शक्ति विश्वविद्यालय के बीच एमओयू, विमानन क्षेत्र में युवाओं को मिलेगा नया अवसर

- नेहा पाठक
नई दिल्ली। देश के विमानन क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) और गति शक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य विमानन, विमानन इंजीनियरिंग और विमानन प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षित करना और कौशल विकास को बढ़ावा देना है।
इस अवसर पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने कहा कि देश में एक मजबूत विमानन विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इस एमओयू को भविष्य के लिए सक्षम कार्यबल तैयार करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।
एमओयू पर डीजीसीए के फैज़ अहमद किदवई और जीएसवी के कुलपति प्रो. मनोज चौधरी ने हस्ताक्षर किए। इस दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

नया एएमई कोर्स होगा शुरू
समझौते के तहत एविएशन मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (एएमई) में तीन वर्षीय बी.एससी. डिग्री कोर्स शुरू किया जाएगा, जो शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगा। इस कोर्स में शैक्षणिक ज्ञान, नियामकीय मानकों और उद्योग आधारित कौशल का समन्वय किया जाएगा।
एमआरओ और रिसर्च को मिलेगा बढ़ावा
इस साझेदारी के तहत सतत विमानन ईंधन (SAF), विमान रखरखाव, पुर्जों के निर्माण और उनके एकीकरण जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही जीएसवी, डीजीसीए अधिकारियों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में भी सहयोग करेगा।
विमानन क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही मांग
मंत्री नायडू ने बताया कि भारत में वर्तमान में लगभग 1700 विमानों के ऑर्डर हैं, जो आने वाले वर्षों में बेड़े का आकार दोगुना कर सकते हैं। वर्ष 2036 तक देश में विमानों की संख्या 3000 तक पहुंचने का अनुमान है, जिसके लिए बड़े पैमाने पर प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता होगी।
‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को मिलेगा बल
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है। इसके लिए ‘मेक इन इंडिया’ और ‘ट्रेन इन इंडिया’ जैसे अभियानों को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह एमओयू नियामक, शैक्षणिक और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करेगा और भारत को वैश्विक स्तर पर एक प्रतिस्पर्धी एमआरओ हब बनाने में सहायक सिद्ध होगा।



