उमर खालिद के मामले में अन्याय, सुप्रीम कोर्ट जाएंगे : कपिल सिब्बल

- सोनाली सिंह
नई दिल्ली। वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद को जमानत न मिलने को ‘‘अन्याय’’ करार दिया है। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन हुआ है और अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में उठाया जाएगा।
सिब्बल ने कहा, “उमर खालिद पिछले चार साल, 11 महीने और 15 दिन से हिरासत में हैं। ज़मानत याचिकाओं पर बार-बार सुनवाई टलती रही, लेकिन फैसला नहीं आया। अगर अदालत ज़मानत नहीं देना चाहती, तो याचिका खारिज कर दे, 20-30 सुनवाई क्यों करनी पड़ती है?”
‘‘समाज और राजनीतिक दल चुप हैं’’
उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र किस दिशा में जा रहा है, यह चिंताजनक है। राजनीतिक दल ऐसे मुद्दे नहीं उठाते क्योंकि उन्हें डर रहता है कि राजनीतिक नुकसान न हो। सिब्बल ने कहा, “लगता है हम सही काम करना नहीं चाहते। वकील, मध्यम वर्ग और समाज भी चुप है।”
स्थगन पर पूर्व CJI की टिप्पणी का जवाब
खालिद की याचिका पर पूर्व प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की कथित टिप्पणी का जिक्र करते हुए सिब्बल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में बचाव पक्ष ने केवल दो बार स्थगन मांगा था, जबकि आरोप सात बार का लगाया गया।
‘‘कोई सीधा सबूत नहीं’’
सिब्बल ने दावा किया कि खालिद के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने खुद कहा है कि जमानत याचिकाओं पर जल्द सुनवाई होनी चाहिए, लेकिन खालिद के मामले में यह सिद्धांत लागू नहीं हुआ।



