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भारतेंदु हरिश्चंद्र जयंती हर्षोल्लास से सम्पन्न

  • सोनम शर्मा

कानपुर नगर। हिंदी साहित्य के जनक कहे जाने वाले भारतेंदु हरिश्चंद्र की जयंती साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था विकासिका के तत्वावधान में कानपुर प्रेस क्लब, नवीन मार्केट में धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम के आरंभ में संस्था के संस्थापक-संयोजक डॉ. विनोद त्रिपाठी ने भारतेंदु जी को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके जीवन एवं योगदान पर प्रकाश डालते हुए हिंदी को और मजबूती देने का संकल्प लिया।

विषय प्रवर्तन करते हुए विकास शुक्ला अक्षत ने बताया कि भारतेंदु जी ने समाज की बुराइयों को दूर करने और जनजागरण के लिए हिंदी साहित्य को हथियार बनाया। उनके लेखन से स्वतंत्रता की भावना और समाज सुधार दोनों को नई दिशा मिली।

मुख्य अतिथि डॉ. दया दीक्षित ने भारतेंदु जी के साहित्य में स्त्री विमर्श और वंचित वर्गों की पीड़ा को उजागर करने की चर्चा करते हुए कहा कि उनके विचार आज भी समाज के लिए प्रेरणादायी हैं। वरिष्ठ शिक्षाविद् डॉ. कृष्ण कुमार शुक्ला ने आशीर्वचन में युवाओं और साहित्यकारों से भारतेंदु जी की विचारधारा से प्रेरणा लेकर हिंदी को और सशक्त करने का आह्वान किया।

अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. गायत्री सिंह ने भारतेंदु जी को आधुनिक हिंदी भाषा का जनक बताते हुए कहा कि समाज को सर्वस्व समर्पित करने की उनकी भावना ने हिंदी को संरक्षित और समृद्ध किया।

कार्यक्रम के अंतर्गत एक काव्य संगम भी आयोजित हुआ, जिसमें शहर के प्रतिष्ठित कवियों और कवित्रियों ने भारतेंदु जी को समर्पित रचनाएँ प्रस्तुत कीं।

इस अवसर पर पूर्व पार्षद विजय नारायण शुक्ला, सतीश गुप्ता, सुरेंद्र गुप्त सीकर, श्यामदेव सिंह, पूर्णिमा त्रिपाठी, गोपी कृष्ण बाजपेई, शशि शुक्ला, उमा विश्वकर्मा, उमेश शुक्ला, दुर्गा बाजपेई, सुनीता तिवारी, भारतेंदु पुरी, अतुल गुप्ता, डॉ. सुषमा सेंगर सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए राकेन्द्र मोहन तिवारी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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