आरएसएस के 100 वर्ष: हेडगेवार से भागवत तक सरसंघचालकों की यात्रा

- समय टुडे डेस्क।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना को आज 100 वर्ष पूरे हो गए। 1925 में नागपुर से शुरू हुआ यह संगठन समय के साथ देश के सबसे बड़े सांस्कृतिक और सामाजिक संगठनों में से एक बन गया। संघ का मूल उद्देश्य समाज को एकजुट करना और चरित्र निर्माण के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करना रहा है। इन 100 वर्षों में आरएसएस का नेतृत्व छह सरसंघचालकों ने किया, जिन्होंने अपनी कार्यशैली और दृष्टिकोण से संगठन की दिशा तय की।
हेडगेवार से शुरुआत
संघ की नींव 27 सितंबर 1925 को नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने रखी। वे पूर्व में कांग्रेस से जुड़े थे लेकिन स्वतंत्र मार्ग चुनते हुए उन्होंने ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ का गठन किया। शुरुआती दौर में शाखाएं छोटे स्तर पर लगीं, लेकिन धीरे-धीरे संगठन ने व्यापक आकार लिया। हेडगेवार के नेतृत्व में संघ की शाखाएं नागपुर से बाहर भी फैलनी शुरू हुईं।
गुरुजी गोलवलकर का दौर
1940 में हेडगेवार के निधन के बाद माधवराव सदाशिव गोलवलकर (गुरुजी) सरसंघचालक बने। उन्होंने लगभग तीन दशकों तक संगठन को नेतृत्व दिया और प्रतिबंधों व कठिनाइयों के बावजूद उसे मजबूत आधार प्रदान किया।
आपातकाल और देवरस का नेतृत्व
1973 में गोलवलकर के निधन के बाद बालासाहेब देवरस ने कमान संभाली। आपातकाल (1975-77) उनके नेतृत्व की सबसे बड़ी चुनौती साबित हुआ। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने “भूल जाओ और माफ कर दो” का संदेश दिया और समाज सुधार की दिशा में कदम बढ़ाए। अस्पृश्यता और जातिगत भेदभाव के खिलाफ उनकी सख्त राय ने संघ की छवि को नया आयाम दिया।
रज्जू भैया और सुदर्शन
देवरस के बाद 1994 में राजेंद्र सिंह ‘रज्जू भैया’ सरसंघचालक बने। वे पहले गैर-महाराष्ट्रियन प्रमुख थे। 2000 में उनके बाद के.एस. सुदर्शन ने जिम्मेदारी संभाली और समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद स्थापित करने पर जोर दिया। उन्होंने मुस्लिम और ईसाई समुदायों से संवाद कर नए रास्ते खोले।
वर्तमान प्रमुख मोहन भागवत
2009 से सरसंघचालक मोहन भागवत संगठन का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्हें संघ के आधुनिकीकरण और विस्तार का प्रतीक माना जाता है। उनके कार्यकाल में दिल्ली में आयोजित व्याख्यान श्रृंखलाओं और विभिन्न क्षेत्रों से संवाद ने संगठन की छवि को और व्यापक बनाया। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें संघ के 100 वर्षों की यात्रा का सबसे परिवर्तनकारी सरसंघचालक बताया।



