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मुलायम सिंह यादव की पुण्यतिथि पर अखिलेश ने दी श्रद्धांजलि, बोले – जो लोग दिल्ली का रास्ता नहीं जानते थे, उन्हें सांसद बना दिया

  • समय टुडे डेस्क।

माजवादी पार्टी के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की तीसरी पुण्यतिथि पर सैफई में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने परिवार के साथ समाधि स्थल पहुंचकर पुष्प अर्पित किए और पिता को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान समाधि स्थल पर बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और नेता मौजूद रहे। सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे।

सपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रो. रामगोपाल यादव ने नेताजी के योगदान को याद करते हुए कहा, “जो लोग दिल्ली का रास्ता नहीं जानते थे, उन्हें उन्होंने सांसद बना दिया। जो लोग लखनऊ नहीं जानते थे, उन्हें विधायक बनाकर भेजा। उन्होंने संघर्ष के जरिए सब कुछ अपने बलबूते पर किया।” श्रद्धांजलि सभा में सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव, फिरोजाबाद सांसद रामजी लाल सुमन सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।

धरती पुत्र मुलायम सिंह यादव की विरासत: सैफई के अखाड़े से सत्ता के शिखर तक

22 नवंबर 1939 को इटावा जिले के सैफई गांव में जन्मे मुलायम सिंह यादव का जीवन संघर्ष, साहस और सामाजिक न्याय की मिसाल रहा। एक किसान परिवार से निकलकर उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति में ऐसी छाप छोड़ी, जिसे मिटाना असंभव है। सैफई के कुश्ती अखाड़े से निकलकर राजनीति के मैदान में आए ‘धरती पुत्र’ मुलायम ने कई दशकों तक यूपी की सियासत की दिशा तय की।

शिक्षक से नेता बने मुलायम सिंह यादव ने 1963 में करहल के जैन इंटर कॉलेज में अध्यापन शुरू किया, लेकिन जल्द ही राम मनोहर लोहिया और राज नारायण जैसे समाजवादी नेताओं के विचारों से प्रभावित होकर राजनीति में प्रवेश किया। 1967 में पहली बार जसवंतनगर से विधायक चुने गए और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1975 की इमरजेंसी के दौरान वे 19 महीने जेल में रहे, जिसने उनके राजनीतिक जीवन को नई दिशा दी।

तीन बार के मुख्यमंत्री और समाजवादी राजनीति के प्रतीक

मुलायम सिंह यादव ने तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया — 1989, 1993 और 2003 में। 1992 में उन्होंने समाजवादी पार्टी की स्थापना की, जिसने जल्द ही यूपी की राजनीति में एक नई धारा पैदा की। किसानों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के हितों की लड़ाई उनकी पहचान बनी।

उनकी नीतियों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव किए। हालांकि, 1990 में अयोध्या कांड के दौरान कारसेवकों पर गोली चलवाने के फैसले ने उन्हें विवादों के केंद्र में भी रखा। बावजूद इसके, वे हमेशा सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्ष राजनीति के प्रतीक बने रहे।

केंद्र की राजनीति और राष्ट्रीय पहचान

1996 में केंद्र की राजनीति में प्रवेश करते हुए मुलायम सिंह यादव संयुक्त मोर्चा सरकार में रक्षा मंत्री बने। उनके कार्यकाल में भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और रक्षा तैयारियों पर कई अहम फैसले लिए गए। उन्होंने हमेशा कहा था, “सामाजिक न्याय के बिना लोकतंत्र अधूरा है।”

मुलायम सिंह यादव ने 7 बार लोकसभा चुनाव और 10 बार विधानसभा चुनाव जीते — यह रिकॉर्ड आज भी अद्वितीय है। वे प्रधानमंत्री पद की दौड़ में भी एक बार सबसे आगे थे, लेकिन राजनीति के समीकरणों ने उन्हें उस मुकाम से दूर रखा।

संघर्ष, सेवा और सादगी की मिसाल

‘नेताजी’ के नाम से मशहूर मुलायम सिंह यादव का जीवन सादगी, जुझारूपन और समाज के सबसे निचले तबके के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा। वे कहते थे, “राजनीति में रहकर लोगों की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म है।”
10 अक्टूबर 2022 को 82 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी विरासत आज भी सपा और भारतीय राजनीति दोनों में जिंदा है।

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