NEWS

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर सहमति के करीब, जल्द हो सकती है घोषणा

  • सोनाली सिंह

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement – BTA) को लेकर बड़ी प्रगति हुई है। दोनों देश इसके पहले चरण को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्ष अधिकांश मुद्दों पर सहमत हो चुके हैं और अब समझौते की अंतिम भाषा पर चर्चा चल रही है।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच मतभेद बहुत सीमित हैं और किसी नए मुद्दे से वार्ता में बाधा नहीं आई है। उन्होंने कहा कि दोनों देश तय समय सीमा में समझौते पर हस्ताक्षर को लेकर आशान्वित हैं।

गुरुवार को दोनों देशों के वार्ताकारों के बीच वर्चुअल बैठक हुई। इस साल मार्च से अब तक पाँच दौर की औपचारिक वार्ताएँ पूरी की जा चुकी हैं। शुरुआती योजना के मुताबिक, इस समझौते पर हस्ताक्षर “2025 की शरद ऋतु” तक किए जाने थे।

इस समझौते का उद्देश्य 2030 तक भारत-अमेरिका व्यापार को मौजूदा 191 अरब डॉलर से बढ़ाकर 500 अरब डॉलर तक ले जाना है। फरवरी में दोनों देशों के नेताओं के निर्देश के बाद इस व्यापार समझौते को औपचारिक रूप से प्रस्तावित किया गया था।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल पिछले महीने अमेरिका दौरे पर थे, जहाँ उन्होंने उच्च-स्तरीय व्यापार वार्ता का नेतृत्व किया। उनके साथ भारत के मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इसी दौरान दोनों देशों ने एक व्यापक और दीर्घकालिक व्यापार ढांचा तैयार करने की दिशा में सहमति जताई।

सितंबर में, अमेरिका के सहायक व्यापार प्रतिनिधि ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने भारत के वाणिज्य विभाग के साथ सकारात्मक चर्चा की थी। दोनों पक्षों ने “परस्पर लाभकारी व्यापार समझौते” को शीघ्र अंतिम रूप देने पर सहमति जताई थी।

हालांकि, कुछ मुद्दों—खासकर कृषि और डेयरी क्षेत्र के बाजार खोलने की अमेरिकी मांग—पर भारत ने आपत्ति जताई थी। भारत का मानना है कि ये क्षेत्र देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और करोड़ों लोगों की आजीविका से सीधे जुड़े हैं।

इस बीच, अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था, जो 1 अगस्त से लागू हुआ। इसके बाद, भारत द्वारा रूसी तेल के आयात को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ और लगा दिया, जिससे कुल शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुँच गया। यह 27 अगस्त से प्रभावी हुआ।

ट्रंप प्रशासन ने उन कई देशों पर भी उच्च टैरिफ लगाए हैं जिनके साथ अमेरिका का व्यापार घाटा है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच यह नया समझौता दोनों देशों के लिए आर्थिक सहयोग और निवेश के नए अवसरों के द्वार खोल सकता है।

Related Articles

Back to top button