HealthNEWS

बच्चों में बढ़ता फैटी लिवर: जीवनशैली पर असर

जीएसवीएम मेडिकल कालेज में यूपीएपीकान का 42वां अधिवेशन हुआ। इसमें SGPGI के निदेशक पद्मश्री डा. आरके धीमान ने कहा कि एड्स, मलेरिया व क्षय रोग की तरह ही अब हेपेटाइटिस ए, बी, सी और ई की चुनौती विकराल होती जा रही है। अब हेपेटाइटिस की यूनिवर्सल स्क्रीनिंग की तैयारी चल रही है। 

  • आनंद सिंह

कानपुर नगर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में आयोजित यूपीएपीकॉन-2025 के 42वें अधिवेशन में एसजीपीजीआई के निदेशक पद्मश्री डॉ. आरके धीमान ने बच्चों में बढ़ते फैटी लिवर और हेपेटाइटिस के बढ़ते मामलों को लेकर गंभीर चेतावनी दी।

स्क्रीन टाइम और खान-पान: मुख्य कारण
डॉ. धीमान ने बताया कि खान-पान और असंतुलित दिनचर्या के कारण अब फैटी लिवर की समस्या केवल 35-40 साल के वयस्कों तक सीमित नहीं रही, बल्कि 10-12 साल के बच्चों में भी फैटी लिवर पाया गया है। उन्होंने कहा कि बच्चों में बढ़ता स्क्रीन टाइम, तोंदियल मोटापा और अनियमित जीवनशैली इसे और बढ़ा रहे हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि फैटी लिवर जीवनशैली से जुड़ी बीमारी है, जो आगे चलकर हृदय, लिवर और अन्य अंगों के गंभीर रोगों का कारण बन सकती है। नियमित व्यायाम और संतुलित खान-पान से इससे बचा जा सकता है।

हेपेटाइटिस रोकथाम और यूनिवर्सल स्क्रीनिंग
डॉ. धीमान ने कहा कि एड्स, मलेरिया और क्षय रोग की तरह ही अब हेपेटाइटिस (A, B, C, E) गंभीर चुनौती बन रही है। गर्भवती हेपेटाइटिस बी पॉजिटिव महिलाओं के शिशुओं को जन्म के समय संक्रमण का खतरा रहता है, लेकिन सही समय पर टेस्ट, ट्रीटमेंट और वैक्सीनेशन से संक्रमण रोका जा सकता है।

उन्होंने बताया कि देश में करीब चार करोड़ लोग हेपेटाइटिस बी से संक्रमित हैं, जबकि 11 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है। अब यूनिवर्सल स्क्रीनिंग की तैयारी है, जिसमें लार से मात्र कुछ सेकंड में रिपोर्ट प्राप्त की जा सकेगी।

वायरल हेपेटाइटिस और लिवर स्वास्थ्य
डॉ. धीमान ने कहा कि वायरल हेपेटाइटिस C 70 प्रतिशत लिवर खराब होने के मामलों में मुख्य कारण बन रहा है। नार्थ ईस्ट और पंजाब में इसके सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं।

गुर्दे की बढ़ती समस्या
लखनऊ के वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अमित गुप्ता ने कहा कि 10 में 1 व्यक्ति को गुर्दे की समस्या है। डायबिटीज, मोटापा और बीपी रोगियों में बिना डॉक्टर की सलाह दवा लेना गुर्दे के लिए गंभीर खतरा है। पिछले 10 साल में गुर्दे के मरीजों में 20% वृद्धि हुई है।

विशेषज्ञों की अहम सलाह

  • बच्चों और किशोरों का स्क्रीन टाइम कम करें।
  • खान-पान और दिनचर्या संतुलित रखें।
  • हेपेटाइटिस की समय पर जांच और टीकाकरण कराएं।
  • गुर्दे, लिवर और हृदय की समस्या के संकेत मिलने पर तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लें।
  • ऑनलाइन सलाह और डॉ. गूगल की जानकारी पर खुद से दवा न लें।

अधिवेशन के अंतिम दिन डा. रिचा गिरि, डॉ. एसके गौतम, डॉ. सौरभ अग्रवाल और डॉ. जेएस कुशवाहा सहित कई विशेषज्ञ उपस्थित रहे। इस अधिवेशन का उद्देश्य बच्चों और वयस्कों में फैटी लिवर, हेपेटाइटिस और क्रॉनिक बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समय पर रोकथाम व उपचार को सुनिश्चित करना था।

Related Articles

Back to top button