आंध्र प्रदेश के वेंकटेश्वर मंदिर में भगदड़, 9 श्रद्धालुओं की मौत — पीएम मोदी और सीएम नायडू ने जताया शोक

- समय टुडे डेस्क।
आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के धर्मपुरम गांव स्थित वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में शनिवार को मची भगदड़ में नौ श्रद्धालुओं की मौत हो गई। मृतकों में आठ महिलाएं और एक बच्चा शामिल हैं, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। इस दर्दनाक हादसे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई नेताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है।
गृह मंत्री वांगलापुडी अनिता ने बताया कि यह मंदिर निजी स्वामित्व में है और धर्मस्व विभाग के अधीन नहीं है। उन्होंने कहा कि सामान्य दिनों में यहां 1,500 से 2,000 श्रद्धालु आते हैं, लेकिन एकादशी और कार्तिक मास के संयोग के कारण शनिवार को भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं की भीड़ सीढ़ियों से ऊपर चढ़ रही थी तभी रेलिंग टूटने से लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े और भगदड़ मच गई।
नेताओं ने व्यक्त किया शोक
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में हुई दुखद घटना में जान-माल की हानि से स्तब्ध हूं। शोकाकुल परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करती हूं।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 2-2 लाख रुपये और घायलों को 2,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। उन्होंने लिखा, “वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में हुई भगदड़ से दुखी हूं। मेरी संवेदनाएं शोकग्रस्त परिवारों के साथ हैं और मैं घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।”
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने घटना को बेहद दर्दनाक बताते हुए कहा कि इस हादसे की गहन जांच कराई जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
स्थानीय प्रशासन की लापरवाही उजागर
पुलिस अधीक्षक के.वी. महेश्वर रेड्डी ने बताया कि मंदिर प्रबंधन ने कार्यक्रम के लिए पुलिस से कोई अनुमति नहीं ली थी। उन्होंने कहा, “यह निजी मंदिर है, जिसका निर्माण हाल ही में हुआ है। रेलिंग टूटने के कारण लोग करीब छह फुट नीचे गिर गए और हादसा हो गया।”
रेड्डी ने कहा कि यह पूरी तरह से मालिक की लापरवाही का परिणाम है और इस मामले में गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जा रहा है। हादसे में घायल 30 लोगों का इलाज पलासा के सरकारी अस्पताल में चल रहा है, जिनमें से कई के हाथ-पैर टूट गए हैं।
95 वर्षीय मंदिर निर्माता मुकुंद पांडा ने स्वीकार किया कि उन्होंने इतनी भीड़ की उम्मीद नहीं की थी और न ही पुलिस को पहले से सूचित किया था।
मुख्यमंत्री नायडू ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि घायलों का बेहतर उपचार सुनिश्चित किया जाए और राहत कार्यों की निगरानी की जाए।
यह हादसा धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा और प्रशासनिक समन्वय की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित करता है।



