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दलितों, पिछड़ों और अति पिछड़ों के अधिकार छीनना चाहती है भाजपा : राहुल गांधी

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को आरोप लगाया कि बिहार में मतदाता सूची से गरीब और वंचित वर्ग के करीब 65 लाख नाम हटा दिए गए हैं। उनका कहना है कि भाजपा दलितों, पिछड़ों और अति पिछड़ों से उनके अधिकार छीनने की कोशिश कर रही है।

राहुल गांधी ने अपनी ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के 12वें दिन सीतामढ़ी में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि महाराष्ट्र की तरह बिहार में भी फर्जी मतदाता जोड़ने का प्रयास किया जाएगा, लेकिन विपक्ष और जनता मिलकर “वोट चोरी” नहीं होने देंगे।

सभा से पहले उन्होंने सीतामढ़ी के प्रसिद्ध जानकी देवी मंदिर में पूजा-अर्चना भी की।

‘‘वोट गया तो सारे अधिकार जाएंगे’’

राहुल गांधी ने कहा, “अगर वोट चला जाएगा तो गरीबों के पास कुछ नहीं बचेगा। शुरुआत वोट से होगी, उसके बाद राशन कार्ड, फिर जमीन और आखिरकार सारे अधिकार छीन लिए जाएंगे।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि देश की पूरी संपत्ति चुनिंदा उद्योगपतियों—अदाणी और अंबानी—को सौंपी जा रही है।

‘‘महाराष्ट्र और हरियाणा में हुआ वोट चोरी’’

राहुल ने दावा किया कि महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों में बड़े पैमाने पर वोट चोरी हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव के दौरान एक करोड़ फर्जी मतदाता जोड़े गए, जिनके सभी वोट भाजपा को गए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि “बेंगलुरु की महादेवपुरा सीट पर ही एक लाख से अधिक फर्जी नाम जोड़े गए थे।”

‘‘संविधान ही दलितों का सबसे बड़ा हथियार’’

सभा के दौरान राहुल गांधी ने संविधान की प्रति दिखाते हुए कहा कि बाबा साहेब आंबेडकर ने जो अधिकार दलितों और वंचित वर्गों को दिए, वही आज भाजपा छीनना चाहती है। उन्होंने कहा, “आजादी से पहले दलितों की स्थिति सब जानते हैं। उन्हें अछूत कहा जाता था, मारपीट होती थी। जो भी सम्मान और अधिकार मिले हैं, वह संविधान के कारण ही संभव हुआ है।”

‘‘बिहारियों की समझ सबसे गहरी’’

राहुल ने कहा कि बिहार की जनता राजनीतिक रूप से बेहद जागरूक है और भाजपा-आरएसएस को यहां वोट चोरी नहीं करने देगी। उन्होंने कहा, “हमारे पास कर्नाटक का सबूत है। आगे चलकर लोकसभा, हरियाणा और बाकी राज्यों के चुनावों का भी सबूत देंगे कि भाजपा और आरएसएस फर्जी वोटिंग कराकर चुनाव जीतते हैं।”

सभा के अंत में राहुल गांधी ने कहा कि बिहार की राजनीतिक समझ का कोई मुकाबला नहीं है और यहां की जनता से उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला है।

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