रतन टाटा जयंती विशेष: भारतीय उद्योग को नई दिशा देने वाले महान नेतृत्व को नमन

- समय टुडे डेस्क।
भारत आज देश के महान उद्योगपति और समाजसेवी दिवंगत रतन टाटा को उनकी जयंती पर श्रद्धापूर्वक याद कर रहा है। इस अवसर पर टाटा समूह के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने मुंबई स्थित बॉम्बे हाउस में रतन टाटा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
रतन टाटा का मानना था कि सच्चा परोपकार व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम होना चाहिए। उनके नेतृत्व में टाटा ट्रस्ट्स ने दान की पारंपरिक अवधारणा से आगे बढ़कर स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक विकास जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक और परिणाम-आधारित दृष्टिकोण अपनाया।
टाटा ट्रस्ट्स ने अपने संदेश में कहा कि रतन टाटा की दूरदृष्टि ने यह स्पष्ट किया कि सार्थक प्रगति के लिए नवाचार, तकनीक और स्थानीय जरूरतों की गहरी समझ का समन्वय आवश्यक है। आज भी उनके विचार और मूल्य संस्थाओं को दिशा दिखा रहे हैं।
देश के कई वरिष्ठ नेताओं ने रतन टाटा को श्रद्धांजलि दी। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि रतन टाटा ने ईमानदारी और करुणा के साथ भारतीय उद्यमिता को नया स्वरूप दिया और उनकी विरासत ‘आत्मनिर्भर भारत’ को प्रेरित करती रहेगी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, पीयूष गोयल और ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित कई नेताओं ने उनके योगदान को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
रतन टाटा ने टाटा समूह को वैश्विक पहचान दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई। 1991 में जेआरडी टाटा के बाद समूह की कमान संभालते हुए उन्होंने संगठनात्मक सुधार किए और युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाया। उनके कार्यकाल में टाटा समूह ने टेटली टी, कोरस स्टील, जगुआर-लैंड रोवर जैसे ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहण किए।
उन्होंने टाटा टेलीसर्विसेज की स्थापना की, टीसीएस को सार्वजनिक किया और किफायती परिवहन के उद्देश्य से टाटा नैनो जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की। बाद के वर्षों में वे स्टार्टअप इकोसिस्टम के प्रमुख मार्गदर्शक और निवेशक भी बने।
कॉर्नेल विश्वविद्यालय से वास्तुकला की शिक्षा प्राप्त करने वाले रतन टाटा सादगी, विनम्रता और परोपकार के प्रतीक थे। उन्हें पद्म भूषण और पद्म विभूषण सहित देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया।
9 अक्टूबर 2024 को रतन टाटा का निधन हो गया, लेकिन उनका जीवन, मूल्य और योगदान भारतीय उद्योग और समाज को आने वाली पीढ़ियों तक प्रेरित करता रहेगा।



