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वृंदावन में ‘सनातन धर्म और जीवन दर्शन’ पुस्तक का विमोचन, जीवनदीप आश्रम का भव्य उद्घाटन

  • मनीष कुमार

मथुरा। श्री वृंदावन धाम की पावन भूमि पर आध्यात्म, सेवा और संस्कार का अद्भुत संगम देखने को मिला। जीवनदीप आश्रम के उद्घाटन के शुभ अवसर पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक की गरिमामयी उपस्थिति में पूज्य स्वामी यतीन्द्रानन्द गिरी द्वारा रचित पुस्तक ‘सनातन धर्म और जीवन दर्शन’ का विधिवत विमोचन किया गया।

यह पुस्तक जगतगुरु शंकराचार्य, पद्म विभूषण एवं भारत माता मंदिर के संस्थापक स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी जी महाराज के पावन चरणों में समर्पित है। कार्यक्रम में संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं और गणमान्य व्यक्तियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।

कार्यक्रम में मोहन भागवत (सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) की विशेष उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया। इस अवसर पर वक्ताओं ने ब्रजभूमि की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि वृंदावन केवल एक स्थान नहीं, बल्कि भक्ति, प्रेम और त्याग की जीवंत अनुभूति है, जहां हर कण में राधा-कृष्ण की लीलाओं की सुगंध बसती है।

उपमुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह पुस्तक सनातन संस्कृति के गूढ़ तत्वों को उजागर करने वाली प्रेरणादायी कृति है, जो समाज को धर्म, कर्तव्य और मानवता के मार्ग पर अग्रसर करती है। उन्होंने कहा कि ब्रजभूमि पर ऐसे आध्यात्मिक ग्रंथ का विमोचन हमारी परंपरा और ज्ञान की अखंड धारा का प्रतीक है।

‘सनातन धर्म और जीवन दर्शन’ पुस्तक में भारतीय संस्कृति और जीवन दर्शन को सरल व सारगर्भित रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें धर्म, दर्शन, योग, गुरु-शिष्य परंपरा, कर्म सिद्धांत, मोक्ष और आत्म-साक्षात्कार जैसे विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है।

इस दौरान जीवन दीप न्यास के सेवा कार्यों की भी सराहना की गई। कहा गया कि यह आश्रम सेवा, संस्कार और आध्यात्म के दीप को प्रज्ज्वलित करते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहारा और संबल पहुंचाने का माध्यम बनेगा।

कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी, साध्वी ऋतंभरा, बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री लक्ष्मी नारायण सहित अनेक संत, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने कामना की कि यह पावन कृति और सेवा कार्य समाज को नई दिशा देने का कार्य करते रहें।

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