राम मंदिर ध्वजारोहण को प्रधानमंत्री मोदी ने बताया ‘युगांतकारी’, कहा– सदियों के घाव भर रहे

- सौरभ शुक्ला
लखनऊ। राम मंदिर पर ध्वजारोहण के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इसे “युगांतकारी क्षण” करार दिया। उन्होंने कहा कि 500 वर्षों पुराने संकल्प की पूर्ति के साथ “सदियों के ज़ख्म और दर्द भर रहे हैं” और पूरा विश्व आज राममय हो गया है।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने राम को विनम्रता में महाबल और मर्यादा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी जड़ों से जुड़े रहना होगा और सांस्कृतिक आत्मविश्वास को मजबूत करना होगा। प्रधानमंत्री के अनुसार कोविदार वृक्ष हमारी अस्मिता की पुनर्स्थापना का प्रतीक है। उन्होंने जोर दिया कि आने वाले दस वर्षों में देश को “मैकाले की मानसिकता” से पूरी तरह मुक्त होना होगा, क्योंकि राजनीतिक स्वतंत्रता के बाद भी हम मानसिक गुलामी से पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाए हैं।
पीएम मोदी ने संबोधन की शुरुआत “सियावर रामचंद्र की जय” के उद्घोष से की और कहा कि यह वह क्षण है जब सदियों की वेदना कम होती महसूस हो रही है। उनके अनुसार, यह उस पाँच शताब्दियों पुराने यज्ञ की पूर्णाहुति है जिसकी अग्नि कभी बुझी नहीं। उन्होंने इसे संकल्प से सिद्धि और “सत्यमेव जयते” का प्रतीक बताया।
कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी संबोधित करते हुए कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था आज साकार हुई है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए 500 वर्षों का संघर्ष आज सार्थक हुआ और यह क्षण उन सभी संतों व महंतों के लिए शांति लेकर आया होगा जिन्होंने इस यात्रा को आगे बढ़ाया। भागवत ने कहा कि मंदिर का स्वरूप अपेक्षा से भी अधिक भव्य निर्मित हुआ है और साथ ही सनातन की ध्वजा को और ऊँचाइयों तक ले जाने की आवश्यकता जताई।
इस आयोजन के साथ 9 नवंबर 2019, 5 अगस्त 2020 और 22 जनवरी 2024 की ऐतिहासिक तिथियों की तरह 25 नवंबर भी सनातन परंपरा और आस्था के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गई। राम मंदिर के शिखर पर धर्मध्वज की प्रतिष्ठा संत समाज और श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय व भावनात्मक पल बन गई।



