यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण आरोपों के बीच हाई-लेवल जांच कमेटी गठित, बाहरी विशेषज्ञ भी शामिल
- नीलम पाठक
मुंबई। Tata Consultancy Services (TCS) ने नासिक से जुड़े चर्चित मामले में बड़ा बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि आरोपी निदा खान कंपनी की HR मैनेजर नहीं थी। कंपनी के मुताबिक, वह नासिक यूनिट में केवल प्रोसेस एसोसिएट के तौर पर कार्यरत थी और किसी भी भर्ती या नेतृत्व से जुड़ी भूमिका में नहीं थी।
कंपनी ने इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चस्तरीय जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। TCS के MD के. कृतिवासन ने जानकारी दी कि जांच प्रेसिडेंट और COO आरती सुब्रमणियन के नेतृत्व में की जा रही है। इसमें बाहरी विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है, जिनमें Deloitte और प्रमुख लॉ फर्म Trilegal की टीमें शामिल हैं।
हाई-लेवल निगरानी समिति का गठन
कंपनी ने जांच की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक निगरानी समिति भी बनाई है, जिसकी अध्यक्षता केकी एम. मिस्त्री कर रहे हैं। आंतरिक जांच की रिपोर्ट इसी समिति को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
कंपनी ने आरोपों को किया खारिज
कृतिवासन ने कहा कि शुरुआती समीक्षा में यौन उत्पीड़न या जबरन धर्मांतरण जैसे आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। साथ ही, कंपनी के एथिक्स या POSH (Prevention of Sexual Harassment) चैनलों पर इस तरह की कोई शिकायत दर्ज नहीं पाई गई है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नासिक यूनिट पूरी तरह चालू है और इसके बंद होने की खबरें गलत हैं। कंपनी ने दोहराया कि वह कर्मचारियों की सुरक्षा, गरिमा और भलाई के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह के दुर्व्यवहार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाती है।
पुलिस जांच भी जारी
इस मामले में अब तक 9 FIR दर्ज की जा चुकी हैं और जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। पुलिस ने 8 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक महिला ऑपरेशंस मैनेजर भी शामिल है। मुख्य आरोपी निदा खान फिलहाल फरार बताई जा रही है।
कंपनी ने कहा है कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है और चाहती है कि मामला पारदर्शी तरीके से सही निष्कर्ष तक पहुंचे।


