निष्कासित छात्रों के समर्थन में उठी आवाज, 18 दिनों से जारी शांतिपूर्ण धरने को मिला विभिन्न संगठनों का समर्थन
- शालिनी शर्मा
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय के तीन छात्रों के निष्कासन के विरोध में छात्रों एवं विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक संगठनों द्वारा छात्र महापंचायत का आयोजन किया गया। महापंचायत में वक्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन से निष्कासन के निर्णय पर पुनर्विचार करने तथा छात्रों के साथ न्याय करने की मांग उठाई।
इस अवसर पर समाजवादी पार्टी की वरिष्ठ नेत्री जूही सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा और संवाद का केंद्र होता है। छात्रों की समस्याओं का समाधान बातचीत और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि निष्कासित छात्र पिछले 18 दिनों से शांतिपूर्ण ढंग से धरना दे रहे हैं और उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

जूही सिंह ने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी बात सुनना और न्यायपूर्ण समाधान निकालना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने मांग की कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए निष्कासन के निर्णय की समीक्षा करे।
महापंचायत में उपस्थित छात्र नेताओं और अन्य वक्ताओं ने भी छात्रों के आंदोलन को लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए निष्कासित छात्रों को न्याय दिलाने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा संस्थानों में संवाद और सहमति के वातावरण को मजबूत किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने अपने संघर्ष को जारी रखने का संकल्प लिया और कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा।


