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फसल अवशेष प्रबंधन प्रशिक्षण का शुभारंभ, किसानों को पराली प्रबंधन की वैज्ञानिक तकनीकों की दी जानकारी

आधुनिक कृषि यंत्रों के इस्तेमाल का दिया गया हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण, पराली जलाने के विकल्पों पर जोर

  • हरिओम गुप्ता

कानपुर नगर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, दिलीप नगर द्वारा 28 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक पांच दिवसीय फसल अवशेष प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को पराली जलाने के विकल्पों, आधुनिक कृषि मशीनरी तथा फसल अवशेषों के वैज्ञानिक एवं लाभकारी उपयोग के प्रति जागरूक करना है।

प्रशिक्षण के दौरान किसानों को इन-सिटू एवं एक्स-सिटू फसल अवशेष प्रबंधन की वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के माध्यम से खेत की उर्वरता बनाए रखने तथा पराली जलाने से होने वाले नुकसान को कम करने के विभिन्न उपायों पर विस्तार से जानकारी दी।

आधुनिक कृषि यंत्रों की दी जानकारी

कार्यक्रम में किसानों को सुपर सीडर, स्मार्ट सीडर, हैप्पी सीडर, मल्चर सहित अन्य आधुनिक कृषि यंत्रों के बारे में जानकारी दी गई। किसानों को इन मशीनों की उपयोगिता, कार्यप्रणाली और फसल अवशेष प्रबंधन में उनकी भूमिका के बारे में बताया गया।

प्रशिक्षण की खास बात यह रही कि किसानों को कृषि मशीनरी का व्यावहारिक एवं हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। इसके माध्यम से किसानों को मशीनों के संचालन और खेत स्तर पर उनके प्रभावी उपयोग को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिला।

एकीकृत कीट प्रबंधन पर भी प्रशिक्षण

प्रशिक्षण कार्यक्रम में एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) पर भी किसानों को जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने कीटों की पहचान, उनकी निगरानी तथा फसल सुरक्षा के वैज्ञानिक उपायों के बारे में विस्तार से बताया। किसानों को फसल में कीट प्रकोप की स्थिति में वैज्ञानिक तरीके अपनाने और अनावश्यक रासायनिक दवाओं के इस्तेमाल से बचने के लिए जागरूक किया गया।

कार्यक्रम में डॉ. दीपक मिश्रा, डॉ. अरुण कुमार सिंह, डॉ. शशिकांत, डॉ. राजेश राय एवं डॉ. निमिषा स्वास्थ्य सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को फसल अवशेषों को समस्या के बजाय कृषि संसाधन के रूप में उपयोग करने तथा आधुनिक तकनीकों को अपनाकर खेत की उत्पादकता और आय को बढ़ाने की दिशा में जागरूक किया जा रहा है।

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