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डॉटर्स डे पर क्लिनिक प्लस का संदेश, ‘बेटी होती है मां की मजबूती’

नई फिल्म में मां-बेटी के अनोखे रिश्ते और आपसी ताकत को किया गया रेखांकित, अभियान देश की 1.3 करोड़ सिंगल मदर्स को समर्पित

  • हरिओम गुप्ता

कानपुर नगर। डॉटर्स डे से पहले क्लिनिक प्लस ने मां-बेटी के रिश्ते को केंद्र में रखते हुए अपना नया अभियान पेश किया है। अभियान का मुख्य संदेश है— ‘मां की मजबूरी नहीं, बेटी होती है मां की मजबूती।’ नई फिल्म के जरिए ब्रांड ने मां और बेटी के उस रिश्ते को सामने रखा है, जिसमें दोनों एक-दूसरे के लिए ताकत और सहारा बनती हैं।

फिल्म में भारतीय परिवारों में मां और बेटियों के बीच बने भावनात्मक रिश्ते को दिखाया गया है। इसमें बताया गया है कि मां अक्सर अपनी बेटियों को अपने अधिकारों के लिए खड़े होने, अपनी आवाज पहचानने और मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने का आत्मविश्वास देती हैं।

वहीं, बेटी भी अपनी मां के त्याग और संघर्ष को करीब से समझती है। मां के अनकहे भावों को महसूस करते हुए वह मुश्किल समय में उसका सहारा बनती है। फिल्म इसी बदलाव को रेखांकित करती है, जहां मां द्वारा बेटी को दी गई मजबूती आगे चलकर मां के लिए ही संबल बन जाती है।

क्लिनिक प्लस के इस अभियान में बेटी को केवल परिवार द्वारा पाली-पोसी जाने वाली संतान के तौर पर नहीं, बल्कि मां की हमराज और भरोसेमंद साथी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उसकी संवेदनशीलता, समझ और खामोश मौजूदगी मां को आगे बढ़ने तथा खुद के लिए फैसले लेने का हौसला देती है।

एचयूएल में ब्यूटी एंड वेलबीइंग की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हरमन ढिल्लों ने कहा कि यह फिल्म उस खूबसूरत बदलाव का उत्सव है, जिसमें मां द्वारा बेटी को दिया गया आत्मविश्वास समय के साथ लौटकर मां का ही संबल और हौसला बन जाता है।

उन्होंने कहा कि यह कहानी देश की 1.3 करोड़ सिंगल मदर्स को समर्पित है। उनके मुताबिक, यह अभियान मजबूत बेटियों को तैयार करने वाली मांओं के साथ क्लिनिक प्लस के लंबे जुड़ाव को आगे बढ़ाता है।

डॉटर्स डे के अवसर पर अभियान मां-बेटी के रिश्ते में आए उस बदलाव को भी सामने रखता है, जहां कभी मां ने बेटी का हाथ पकड़कर उसे मजबूत बनना सिखाया था और आज वही बेटी मुश्किल वक्त में मां का हाथ थामकर उसका सहारा बनती है।

क्लिनिक प्लस के इस अभियान का संदेश है कि मां अपनी बेटी को जो आत्मविश्वास और ताकत देती है, वह कई बार समय के साथ उसी मां के पास लौटकर उसका सहारा बन जाती है। इसी भाव को नई फिल्म के माध्यम से मां-बेटी के रिश्ते की खूबसूरती के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

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