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विश्व डॉल्फिन दिवस पर विशेष: गंगा में पॉलीथीन, प्लास्टिक बोतल और कचरा डालने से बढ़ा खतरा

उच्च प्राथमिक विद्यालय सिठमरा में बच्चों ने डॉल्फिन संरक्षण और गंगा को स्वच्छ रखने की ली शपथ, प्रधानाध्यापक ने कहा—गंगा स्नान के दौरान न फैलाएं गंदगी

  • आशीष तिवारी

कानपुर देहात। विश्व डॉल्फिन दिवस के अवसर पर उच्च प्राथमिक विद्यालय सिठमरा में डॉल्फिन संरक्षण एवं गंगा की स्वच्छता को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बच्चों को गंगा डॉल्फिन के महत्व, उसके प्राकृतिक आवास और नदी में बढ़ते प्रदूषण से उसके सामने उत्पन्न हो रहे खतरों के बारे में जानकारी दी गई। इस दौरान बच्चों ने डॉल्फिन संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करने और गंगा को स्वच्छ रखने की शपथ भी ली।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक शनेन्द्र सिंह तोमर ने बच्चों को संबोधित करते हुए बताया कि मीठे पानी की लुप्तप्राय प्रजाति गंगा डॉल्फिन, जिसे हिंदी में ‘सुसु’ के नाम से भी जाना जाता है, गंगा, ब्रह्मपुत्र और उनकी सहायक नदियों के तेज प्रवाह तथा गहरे हिस्सों में पाई जाती है। गंगा डॉल्फिन अपने शिकार का पता लगाने के लिए ध्वनि तरंगों का उपयोग करती है।

उन्होंने कहा कि गंगा डॉल्फिन केवल भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव ही नहीं, बल्कि नदियों के स्वास्थ्य और जैव विविधता का महत्वपूर्ण संकेतक भी है। उन्होंने बच्चों से कहा कि जब भी वे गंगा में स्नान करने जाएं तो नदी में किसी भी प्रकार की गंदगी, प्लास्टिक या अन्य कचरा न डालें।

सहायक अध्यापक नवीन कुमार दीक्षित ने कहा कि डॉल्फिन संरक्षण के लिए नदियों को प्रदूषण से बचाना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि पॉलीथीन, प्लास्टिक की बोतलें, पूजा सामग्री, राख, मृत जीवों और अन्य अपशिष्ट को नदी के जल प्रवाह में डालने से जलीय जीवों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने बच्चों से नदी में कचरा न डालने और आसपास के लोगों को भी इसके लिए जागरूक करने की अपील की।

शिक्षक माया देवी ने डॉल्फिन की विभिन्न प्रजातियों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि डॉल्फिन अत्यधिक बुद्धिमान और सामाजिक जलीय स्तनपायी जीव हैं। उन्होंने बच्चों को डॉल्फिन की प्रमुख प्रजातियों और उनके व्यवहार के बारे में जानकारी दी।

अनुदेशक प्रियंका यादव ने कहा कि डॉल्फिन जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने बच्चों को समझाया कि वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों का संरक्षण पर्यावरण संतुलन के लिए आवश्यक है।

कार्यक्रम के अंत में बच्चों ने डॉल्फिन संरक्षण और गंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए कम से कम 10 लोगों को जागरूक करने की शपथ ली। बच्चों ने संकल्प लिया कि वे स्वयं नदी में कचरा नहीं डालेंगे और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को भी गंगा एवं जलीय जीवों के संरक्षण के प्रति जागरूक करेंगे।

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