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कानपुर में तीन दिवसीय उत्तर क्षेत्रीय किसान मेले का भव्य समापन, 25 हजार से अधिक लोगों ने लिया हिस्सा

₹50 लाख के बीज और पौध सामग्री की हुई बिक्री, 175 से अधिक स्टॉलों पर दिखीं आधुनिक कृषि तकनीकें और नवाचार

  • हरिओम गुप्ता

कानपुर नगर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर में आयोजित तीन दिवसीय उत्तर क्षेत्रीय किसान मेले का 17 अक्टूबर को पुरस्कार वितरण समारोह के साथ समापन हो गया। 15 से 17 अक्टूबर 2026 तक चले इस मेले में 25 हजार से अधिक लोगों ने सहभागिता की। आयोजन के दौरान विश्वविद्यालय में उत्पादित बीज एवं पौध सामग्री की लगभग ₹50 लाख की बिक्री हुई। मेले में आधुनिक कृषि तकनीकों, वैज्ञानिक नवाचारों और कृषि उद्यमिता से जुड़ी जानकारियों को साझा करने के लिए व्यापक मंच उपलब्ध कराया गया।

समापन समारोह में मुख्य अतिथि एचबीटीयू के कुलपति डॉ. शमशेर सिंह और एनएसआई की निदेशक डॉ. सीमा परोहा ने किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने, कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने, बेहतर विपणन व्यवस्था विकसित करने तथा प्राकृतिक एवं जैविक खेती की संभावनाओं पर ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने हरित क्रांति में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक योगदान की सराहना करते हुए कृषि वैज्ञानिकों और विश्वविद्यालय परिवार को बधाई दी।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर के निदेशक डॉ. जी.पी. दीक्षित, रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी के निदेशक शोध डॉ. एस.के. चतुर्वेदी, बांदा कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार डॉ. एन.के. बाजपेई, कृषि विभाग के पूर्व संयुक्त निदेशक डॉ. नंद किशोर, गृह विज्ञान की अधिष्ठाता डॉ. सीमा सोनकर और चंद्रशेखर कृषक समिति के अध्यक्ष बाबू सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अतिथियों ने किसानों की समृद्धि, कृषि क्षेत्र में नवाचार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मेले की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए निदेशक प्रसार डॉ. वी.के. त्रिपाठी ने बताया कि आयोजन में 175 से अधिक स्टॉल लगाए गए थे, जहां कृषि तकनीकों, उत्पादों और नवाचारों का प्रदर्शन किया गया। विश्वविद्यालय द्वारा उत्पादित बीज एवं पौध सामग्री की बिक्री लगभग ₹50 लाख तक पहुंची, जबकि मेले में 25 हजार से अधिक लोगों ने भागीदारी की। इस दौरान किसानों को आधुनिक खेती के तरीकों और कृषि से जुड़ी नई तकनीकों की जानकारी भी दी गई।

किसान मेले में ड्रोन तकनीक, स्मार्ट फार्मिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), प्राकृतिक खेती और जैविक कृषि जैसे विषयों पर विशेष प्रदर्शन किए गए। इन प्रदर्शनों के माध्यम से किसानों को खेती में तकनीक के उपयोग, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और कृषि कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने के तरीकों से परिचित कराया गया। मेले में लगभग 35 स्वयं सहायता समूहों को भी अपने उत्पादों और उद्यमों का प्रदर्शन करने का अवसर मिला।

समापन समारोह के दौरान उत्कृष्ट प्रतिष्ठानों, बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों, महिला क्लब और विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया। पुरस्कार वितरण के माध्यम से कृषि क्षेत्र में नवाचार, उद्यमिता और उत्कृष्ट कार्यों को प्रोत्साहित किया गया। मेले में किसानों, कृषि उद्यमियों और वैज्ञानिकों के बीच संवाद तथा अनुभवों के आदान-प्रदान पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता ने किसान मेले को वैज्ञानिकों, शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, किसानों और कृषि उद्यमियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि किसानों का विश्वविद्यालय के प्रति अटूट विश्वास उसकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। उन्होंने कृषि अनुसंधान और तकनीकी जानकारी को किसानों तक पहुंचाने के महत्व पर भी जोर दिया।

पुरस्कार वितरण और विभिन्न उपलब्धियों के साथ संपन्न हुआ यह आयोजन कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी हस्तांतरण और किसान समृद्धि को बढ़ावा देने के प्रयासों का महत्वपूर्ण उदाहरण बना। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सभी अधिष्ठाता, निदेशक, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, वैज्ञानिक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

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