गेहूं की पारंपरिक और वैज्ञानिक खेती के उत्पादन की होगी तुलना, सब्जियों व फूलों की खेती से आय का भी होगा आकलन; खाद की कालाबाजारी और जबरन टैगिंग पर कार्रवाई के निर्देश
- हरिओम गुप्ता
कानपुर नगर। किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए कानपुर नगर में दो मॉडल फार्म विकसित किए जाएंगे। इन फार्मों पर किसान पारंपरिक और वैज्ञानिक खेती के परिणामों की तुलना कर सकेंगे। साथ ही सब्जियों, फूलों और अन्य नकदी फसलों से होने वाली कमाई का व्यावहारिक आकलन भी किया जाएगा। बुधवार को विकास भवन सभागार में आयोजित किसान दिवस की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने वर्तमान बुवाई सीजन में किसानों को खाद की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
जिलाधिकारी ने बताया कि पहले मॉडल फार्म में एक ही किसान की कृषि भूमि को दो बराबर हिस्सों में बांटकर गेहूं की खेती कराई जाएगी। एक हिस्से में पारंपरिक पद्धति से और दूसरे हिस्से में वैज्ञानिक तकनीकों एवं उन्नत कृषि विधियों के माध्यम से फसल उगाई जाएगी। फसल तैयार होने के बाद दोनों हिस्सों के उत्पादन की तुलना की जाएगी, जिससे किसानों को वैज्ञानिक खेती से होने वाले संभावित लाभ का प्रत्यक्ष अनुभव मिल सके। आवश्यकता पड़ने पर वैज्ञानिक पद्धति से खेती का अतिरिक्त खर्च संबंधित विभाग द्वारा वहन किया जाएगा।
दूसरे मॉडल फार्म में पारंपरिक फसलों के साथ अधिक आय देने वाली नकदी फसलों की खेती का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके तहत किसान अपनी आधी भूमि पर पारंपरिक फसल और शेष भूमि पर मौसमी सब्जियां, फूल तथा अन्य नकदी फसलें उगाएंगे। उपलब्ध संसाधनों के अनुसार मशरूम उत्पादन, मत्स्य पालन और बत्तख पालन जैसी कृषि आधारित गतिविधियों को भी शामिल किया जाएगा। इन सभी विकल्पों में लागत, उत्पादन और शुद्ध आय का आकलन कर किसानों को लाभकारी खेती के विकल्पों की जानकारी दी जाएगी।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मॉडल फार्मों को ऐसे व्यावहारिक प्रदर्शन केंद्रों के रूप में विकसित किया जाए, जहां किसान नई कृषि तकनीकों को करीब से समझ सकें। इसका उद्देश्य किसानों को अपनी भूमि, उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप बेहतर कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
खाद की आपूर्ति और वितरण पर रहेगी रोजाना निगरानी
किसान दिवस में जिलाधिकारी ने वर्तमान बुवाई सीजन के दौरान यूरिया, डीएपी और एनपीके सहित प्रमुख उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खाद की खेप प्राप्त होते ही उसे सहकारी समितियों तक पहुंचाया जाए, ताकि गोदामों में अनावश्यक भंडारण न हो और किसानों को समय पर उर्वरक मिल सके। साथ ही खाद की उपलब्धता, स्टॉक और वितरण की प्रतिदिन निगरानी करने तथा कम स्टॉक वाली समितियों की नियमित समीक्षा करने को कहा।
जिलाधिकारी ने खाद की आपूर्ति और वितरण से संबंधित शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बुवाई के महत्वपूर्ण समय में किसानों को खाद के लिए अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए बाजार में उर्वरकों की उपलब्धता बनाए रखने और वितरण व्यवस्था पर लगातार नजर रखने को कहा गया।
ओवरप्राइसिंग और जबरन टैगिंग पर होगी कार्रवाई
जिलाधिकारी ने निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर खाद बेचने और उर्वरक के साथ अन्य उत्पाद जबरन खरीदने के लिए बाध्य करने जैसी शिकायतों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से ऐसी गतिविधियों की निगरानी करने और शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा, ताकि किसानों को उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध हो सके।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को दी आधुनिक तकनीकों की जानकारी
किसान दिवस के दौरान चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक खेती के तरीकों की जानकारी दी। उपनिदेशक कृषि, जिला उद्यान अधिकारी, भूमि संरक्षण अधिकारी और सहायक निदेशक मत्स्य सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने किसानों के लिए संचालित योजनाओं, सुविधाओं और कार्यक्रमों के बारे में विस्तार से बताया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों और किसान प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन, उपनिदेशक कृषि डॉ. आर.एस. वर्मा, जिला कृषि अधिकारी अरुणेश सिंह, जिला उद्यान अधिकारी नरेश कुमार उत्तम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कृषि वैज्ञानिक मौजूद रहे।


