CM योगी ने की कारागार प्रशासन विभाग की समीक्षा, गंभीर रूप से बीमार कैदियों की समयपूर्व रिहाई पर दिए निर्देश

- सौरभ शुक्ला
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को अपने सरकारी आवास पर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं विभाग के कार्यों की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने गंभीर बीमारियों से ग्रसित कैदियों की समयपूर्व रिहाई के नियमों को और अधिक सरल, स्पष्ट व मानवीय बनाने पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए राज्य की नीति को पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाएगा। पात्र कैदियों की रिहाई स्वतः विचाराधीन होनी चाहिए, इसके लिए उन्हें अलग से आवेदन न करना पड़े।
मुख्यमंत्री के प्रमुख निर्देश:
- प्रदेश की सभी जेलों में सर्वे कर यह आकलन किया जाए कि कितने सिद्धदोष कैदी घातक बीमारियों, अशक्तता या वृद्धावस्था के कारण भविष्य में अपराध करने में स्थायी रूप से असमर्थ हैं।
- महिलाओं और बुजुर्ग कैदियों को प्राथमिकता के आधार पर रिहाई दी जाए।
- कैदियों को कृषि, गोसेवा जैसे कार्यों से जोड़ा जाए ताकि जेल अवधि का सदुपयोग हो सके।
- यह स्पष्ट रूप से तय किया जाए कि किन बीमारियों को “असाध्य रोग” की श्रेणी में रखा जाएगा।
- हत्या, आतंकवाद, देशद्रोह तथा महिला और बच्चों के विरुद्ध जघन्य अपराधों में दोषी कैदियों की रिहाई किसी भी स्थिति में न हो।
- हर वर्ष जनवरी, मई और सितम्बर में पात्र कैदियों के मामलों की स्वतः समीक्षा की जाए। जिन कैदियों को रिहाई न दी जाए, उसके कारण स्पष्ट दर्ज हों और उन्हें निर्णय को चुनौती देने का अधिकार मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, त्वरित और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित होनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की अनुशंसाओं को अपनाने पर भी विचार करने के निर्देश दिए, ताकि कैदियों को न्यायिक अधिकारों का लाभ आसानी से मिल सके।
उन्होंने अधिकारियों से जल्द ही नई नीति का प्रारूप तैयार कर अनुमोदन हेतु प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।



