IMA कानपुर और एआरएस द्वारा “कृत्रिम बुद्धिमत्ता का वैश्विक प्रभाव” विषय पर सीएमई का आयोजन

विशेषज्ञों ने चिकित्सा, कानून और समाज में एआई के बढ़ते प्रभाव पर रखी राय
- रितिका शुक्ला
कानपुर नगर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) कानपुर शाखा और शैक्षणिक अनुसंधान सोसाइटी (Academic Research Society – ARS) के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2025 को “कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) का वैश्विक प्रभाव – चिकित्सकीय, आर्थिक, कानूनी एवं सामाजिक आयाम, विशेष रूप से भारत के संदर्भ में” विषय पर एक सतत् चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम (CME) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का स्थल था — ऑडिटोरियम, टेंपल ऑफ सर्विस, आईएमए भवन, परेड, कानपुर।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने चर्चा की कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) किस प्रकार आधुनिक चिकित्सा, स्वास्थ्य सेवाओं, अर्थव्यवस्था, कानून और समाज की दिशा को बदल रही है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता रहे वेलिंगबरो (इंग्लैंड) के मेयर एवं यूनाइटेड किंगडम के काउंसिलर श्री राज कुमार मिश्रा, जिन्होंने अपने सारगर्भित संबोधन में एआई से जुड़ी नैतिक एवं सामाजिक जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारत के लिए एआई क्षेत्र में चिकित्सा और शासन व्यवस्था के अवसरों पर भी विस्तृत चर्चा की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आईएमए कानपुर शाखा के अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा ने की, जबकि समन्वयक की भूमिका डॉ. पवन कुमार तिवारी (मुख्य स्थायी अधिवक्ता, भारत सरकार) ने निभाई।
इस अवसर पर डॉ. नंदिनी रस्तोगी, डॉ. संजय रस्तोगी, डॉ. वी.सी. रस्तोगी, डॉ. दीपक श्रीवास्तव (वैज्ञानिक सचिव, आईएमए), डॉ. राम तिवारी (अध्यक्ष, एआरएस), और अधिवक्ता मोहित पांडेय (उपाध्यक्ष, एआरएस) सहित अनेक प्रतिष्ठित अतिथि उपस्थित रहे।
सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने एआई के चिकित्सकीय निर्णय प्रक्रिया, मेडिकल शिक्षा, डेटा सुरक्षा और मेडिको-लीगल पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
इसके पश्चात् मुख्य अतिथि एवं वक्ताओं को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए स्मृति चिह्न प्रदान किए गए।
अपने संबोधन में श्री मिश्रा ने बताया कि वे किसान परिवार से हैं और भारत, विशेषकर उत्तर प्रदेश से उनका गहरा लगाव है। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी प्रदेश में ₹2,500 करोड़ के निवेश से एआई पर व्यापक कार्य करने जा रही है, जिससे आम जनता को इसका लाभ मिलेगा।
प्रतिभागियों ने एआई से जुड़ी रोजगार और सुरक्षा संबंधी आशंकाओं को निराधार बताते हुए कहा कि यह तकनीक मानव क्षमताओं को बढ़ाने का माध्यम है, न कि उन्हें समाप्त करने का।
कार्यक्रम का समापन आभार ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें यह संदेश दिया गया कि एआई का उपयोग नैतिक, संतुलित और मानव-केंद्रित दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर विजय नारायण तिवारी, अभिनव, विनय, साकेत, अमित, प्रवीण, सौरभ सहित चिकित्सा, विधि, सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियाँ उपस्थित रहीं।



