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बिहार चुनाव से पहले गिरिराज सिंह के बयान से बढ़ा सियासी पारा, विपक्ष ने साधा निशाना

  • संगम झा

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के विवादित बयान ने सियासत को गरमा दिया है। अरवल में भाजपा की रैली के दौरान उन्होंने विपक्षी महागठबंधन पर हमला बोलते हुए कहा कि उनकी पार्टी “नमक हराम (कृतघ्न)” लोगों के वोट नहीं मांगती।

शनिवार को भाजपा उम्मीदवार के नामांकन रैली में बोलते हुए गिरिराज सिंह ने भाजपा शासन की तुलना पिछली सरकारों से की और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गरीबों के हित में योजनाएं धरातल पर उतरी हैं।

सिंह ने एक मुस्लिम व्यक्ति से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा, “मैंने उनसे पूछा—क्या आपको आयुष्मान कार्ड मिला? उन्होंने कहा—हां। क्या इसमें हिंदू-मुसलमान का कोई भेद था? उन्होंने कहा—नहीं। फिर मैंने पूछा—क्या आपने हमें वोट दिया? उन्होंने कहा—नहीं। तब मैंने कहा—मुझे नमक हरामों के वोट नहीं चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “कांग्रेस और लालू यादव ने गरीबी हटाओ का नारा दिया, लेकिन किया कुछ नहीं। मोदी सरकार ने वादे पूरे किए हैं।”

गिरिराज सिंह की इस टिप्पणी पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
पप्पू यादव ने कहा, “केंद्रीय मंत्री भाषा की मर्यादा लांघ रहे हैं। उन्हें पहले देश के असली गद्दारों का इतिहास याद करना चाहिए।”
वहीं शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने सवाल उठाया, “अगर कोई आपको वोट नहीं देता तो क्या वह नमक हराम हो गया? प्रधानमंत्री को ऐसे मंत्री को मंत्रिपरिषद से बाहर करना चाहिए।”

राउत ने कहा, “हिंदू-मुसलमान के नाम पर वोटों को बांटना गलत है। क्या महाराष्ट्र, बंगाल या केरल में जिन्होंने भाजपा को वोट नहीं दिया, वे भी कृतघ्न हैं? गिरिराज सिंह का यह बयान बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और विभाजनकारी है।”

इस बीच, अरवल में अपने संबोधन के दौरान गिरिराज सिंह ने बिहार में विकास कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य में सड़क, शिक्षा और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार हुआ है। “आज की सड़कें पहले से बेहतर हैं। महिलाएं अब रात में सुरक्षित घर लौट सकती हैं — यह एनडीए सरकार की देन है,” उन्होंने कहा।

सिंह ने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगा। उन्होंने विपक्षी महागठबंधन को “ठगबंधन” बताते हुए कहा, “महागठबंधन के भीतर तालमेल नहीं है। वे चार दर्जन सीटों पर एक-दूसरे के खिलाफ हैं। उनकी हालत ‘दिल के टुकड़े हजार हुए, कोल यहां गिरे, कोल वहां गिरे’ जैसी है।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एनडीए के पास स्पष्ट “नेता, नेतृत्व और नीति” है, जबकि महागठबंधन भ्रम और अविश्वास से ग्रस्त है। बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान 6 और 11 नवंबर को होगा, जबकि नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।

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