आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक भंडारण व्यवस्था का लिया जायजा, निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह बोले- कृषि नवाचार और मूल्य संवर्धन से बढ़ेगी किसानों की आय
- हरिओम गुप्ता
कानपुर नगर। कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आईसीएआर-अटारी जोन-3, कानपुर के निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह ने ‘कैरट किंग’ के नाम से प्रसिद्ध कर्नल (सेवानिवृत्त) सुभाष देशवाल की अत्याधुनिक गाजर भंडारण एवं प्रसंस्करण इकाई का भ्रमण किया। इस दौरान उनके साथ कृषि विज्ञान केंद्र बुलंदशहर, गौतम बुद्ध नगर और हापुड़ के प्रमुखों सहित कई प्रगतिशील किसान भी मौजूद रहे।
भ्रमण के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने गाजर के वैज्ञानिक भंडारण, आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाओं और फसल कटाई के बाद अपनाई जाने वाली उन्नत प्रबंधन तकनीकों की जानकारी प्राप्त की। प्रतिनिधिमंडल ने इकाई में उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं का अवलोकन करते हुए यह समझा कि वैज्ञानिक तरीके से फसलों का भंडारण और प्रबंधन किस प्रकार उनकी गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
इस अवसर पर निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह ने कहा कि आधुनिक भंडारण व्यवस्था, मूल्य संवर्धन और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के साथ किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि कर्नल सुभाष देशवाल द्वारा विकसित अत्याधुनिक सुविधाएं कृषि उद्यमिता और नवाचार का प्रेरणादायक उदाहरण हैं।
उन्होंने आगे कहा कि ऐसे सफल कृषि मॉडल से सीख लेकर कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से उन्नत तकनीकों को किसानों तक पहुंचाया जा सकता है। इससे किसानों को फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2025 में कर्नल (सेवानिवृत्त) सुभाष देशवाल को ‘यूपी गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया था। भारतीय सेना में अपनी सेवाएं देने के बाद उन्होंने कृषि उद्यमिता के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी यह यात्रा किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत मानी जा रही है।
उनकी आधुनिक गाजर भंडारण एवं प्रसंस्करण इकाई फसल की गुणवत्ता बनाए रखने, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और बेहतर विपणन की संभावनाओं को मजबूत करने में सहायक है। इस प्रकार की सुविधाएं किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक कृषि व्यवसाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।
यह भ्रमण कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञों और प्रगतिशील किसानों के बीच तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा। इसके माध्यम से आधुनिक एवं लाभकारी कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने तथा किसानों तक नई तकनीकों की जानकारी पहुंचाने पर जोर दिया गया।


