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आईडीबीआई बैंक के निजीकरण के विरोध में बैंक कर्मियों ने बांधी काली पट्टी

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर कानपुर में विरोध प्रदर्शन, सरकार से निजीकरण और विदेशीकरण का फैसला वापस लेने की मांग

  • हरिओम गुप्ता

कानपुर नगर। आईडीबीआई बैंक के निजीकरण एवं विदेशीकरण के विरोध में कानपुर के बैंक कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर बैंक कर्मियों ने इस कदम के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से निजीकरण की नीति पर पुनर्विचार करने और प्रस्तावित निर्णय वापस लेने की मांग की।

ज्ञातव्य है कि केंद्र सरकार अपनी निजीकरण नीति के तहत आईडीबीआई बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रही है। भारत सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) मिलकर बैंक की लगभग 94 प्रतिशत हिस्सेदारी पर नियंत्रण रखते हैं। बैंक की हिस्सेदारी बेचने की प्रस्तावित प्रक्रिया को लेकर बैंक यूनियनों में विरोध देखने को मिल रहा है।

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के नगर संयोजक रजनीश गुप्ता ने कहा कि आईडीबीआई बैंक का मामला केवल निजीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विदेशीकरण से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि बैंक की हिस्सेदारी विदेशी निवेशक को बेचे जाने का प्रस्ताव चिंता का विषय है। बैंक कर्मियों का मानना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता की जमा पूंजी की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

रजनीश गुप्ता ने बैंक के वित्तीय प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि आईडीबीआई बैंक में लगभग 3 लाख 50 हजार करोड़ रुपये की सार्वजनिक जमा राशि है। इसके अलावा, बैंक ने पिछले तीन वर्षों में क्रमशः 5,600 करोड़ रुपये, 7,500 करोड़ रुपये और 9,500 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। उन्होंने कहा कि लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले बैंक के निजीकरण का निर्णय उचित नहीं है।

उन्होंने प्रस्तावित विनिवेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब बैंक अच्छा मुनाफा अर्जित कर रहा है और उसमें बड़ी मात्रा में जनता की जमा पूंजी है, तो उसकी हिस्सेदारी बेचने का निर्णय जनहित के दृष्टिकोण से विचारणीय है। बैंक यूनियन इस कदम को अनुचित और अवांछनीय मानती है।

बैंक कर्मियों ने विरोध के माध्यम से केंद्र सरकार से आईडीबीआई बैंक के निजीकरण एवं विदेशीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाने और अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की। उनका कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से जुड़े फैसले लेते समय कर्मचारियों, खाताधारकों और व्यापक जनहित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

बैंक कर्मियों ने स्पष्ट किया कि वे आईडीबीआई बैंक के निजीकरण के प्रस्ताव का विरोध करते हैं और सरकार से इसे वापस लेने की मांग करते हैं।

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