
डॉ. सुषमा सेंगर के एकल काव्यपाठ से हुआ मासिक आयोजन का शुभारंभ, गीत, गजल, कुंडलिया और कविताओं की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध
- सौम्या पांडेय
कानपुर नगर। साहित्य, संस्कृति और संवेदनाओं से सराबोर मासिक ‘सप्तरंग काव्य संगम’ का आयोजन रविवार, 1 नवंबर 2026 को आर्यावर्त सरस्वती विद्या मंदिर, वी-मार्ट के निकट, नौबस्ता-हमीरपुर रोड, कानपुर में किया गया। प्रत्येक महीने के प्रथम रविवार को आयोजित होने वाला यह साहित्यिक कार्यक्रम कवियों और साहित्य प्रेमियों को अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए एक साझा मंच प्रदान करता है। आयोजन में शहर के अनेक साहित्यकारों और कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से साहित्यिक वातावरण को भावपूर्ण बना दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. सुषमा सेंगर के एकल काव्यपाठ से हुआ। उन्होंने वाणी वंदना के साथ अपनी साहित्यिक प्रस्तुतियों की शुरुआत की। इसके बाद कुंडलिया, गीत और गजलों के माध्यम से काव्य की विविध विधाओं को प्रस्तुत करते हुए श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं। उनकी प्रभावशाली प्रस्तुति ने कार्यक्रम में साहित्यिक रंग भर दिया।
इसके उपरांत आयोजित काव्यपाठ सत्र में शायर अनुज सिंह मनमीत, शिव कुमार पाण्डेय विराट, वंश गोपाल मिश्र वंश, सतीश गुप्त संपादक अनन्तिम, आचार्य राम सिंह विकल, रमेश मिश्र आनंद, निधि विश्वकर्मा, निधि मुद्देशिया, धीरपाल सिंह धीर, साधना सचान, उदय नारायण उदय, कनक लता, मनीष सरल, राजा हशन राजा, श्याम सुंदर निगम, अक्षत व्योम, महेंद्र विश्वकर्मा, गोविंद नारायण साण्डिल्य, सुरेश गुप्त राजहंस और गोविंद जलज ने अपनी-अपनी रचनाओं का प्रभावशाली काव्यपाठ किया।
कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से जीवन के विभिन्न पहलुओं, सामाजिक सरोकारों, मानवीय संवेदनाओं और समकालीन परिस्थितियों को शब्दों में पिरोया। गीत, गजल और कविताओं की विविध प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को साहित्य की अलग-अलग विधाओं और भावों से परिचित कराया। पूरे आयोजन के दौरान साहित्यिक उत्साह और रचनात्मक ऊर्जा का माहौल बना रहा।
कार्यक्रम में श्री अशोक कुमार शुक्ल और संजोग गुप्त सहित अन्य साहित्य प्रेमियों ने उपस्थित रहकर कवियों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया। सप्तरंग काव्य संगम का यह आयोजन साहित्यकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और साहित्यिक संवाद को आगे बढ़ाने का एक सार्थक अवसर साबित हुआ।


