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टीजीटी-पीजीटी भर्ती की विसंगतियां दूर करने की मांग, अभ्यर्थियों ने अखिलेश यादव को सौंपा ज्ञापन

नई भर्ती नियमावली से 6 से 7 लाख अभ्यर्थियों के प्रभावित होने का दावा, पात्रता, आरक्षण और टीईटी की अनिवार्यता पर पुनर्विचार की मांग

  • अखिलेश कुमार अग्रहरि

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को टीजीटी-पीजीटी भर्ती के अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपकर भर्ती नियमावली में कथित विसंगतियों को दूर करने और वंचित अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने भर्ती प्रक्रिया में शैक्षणिक योग्यता, विषयगत अर्हता, आरक्षण, टीईटी, बीएड और नॉन-बीएड अभ्यर्थियों से संबंधित प्रावधानों की समीक्षा कराने का आग्रह किया।

अभ्यर्थियों ने ज्ञापन में दावा किया कि नई भर्ती नियमावली में कई विसंगतियों के कारण लगभग 6 से 7 लाख योग्य अभ्यर्थी आवेदन करने और भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के अवसर से वंचित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि नियमावली में आवश्यक संशोधन कर पात्र अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर दिया जाना चाहिए, ताकि भर्ती प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

प्रतिनिधिमंडल ने राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय सहित अन्य विश्वविद्यालयों की ओर से जारी स्नातक के समतुल्य एकल विषय प्रमाणपत्र कार्यक्रमों को मान्यता देने की मांग की। अभ्यर्थियों का कहना है कि संबंधित प्रमाणपत्र धारकों को भर्ती में आवेदन का अवसर मिलना चाहिए। इसके साथ ही पुरानी नियमावली के तहत पात्र रहे, लेकिन नई नियमावली के कारण आवेदन से वंचित हुए अभ्यर्थियों को विशेष अवसर देने और इस संबंध में शासनादेश जारी करने की मांग भी उठाई गई।

ज्ञापन में नई नियमावली के तहत निर्धारित पात्रता, विषयगत अर्हता, आरक्षण और परीक्षा संबंधी प्रावधानों की समीक्षा कर विसंगतियों को दूर करने की मांग की गई। प्रतिनिधिमंडल ने ओबीसी, एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस और अनारक्षित वर्ग के पदों का विषयवार एवं श्रेणीवार विवरण सार्वजनिक करने की अपील की, ताकि आरक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे। बीएड में प्रवेश और भर्ती की शैक्षणिक अर्हताओं के बीच समानता सुनिश्चित करने तथा आरक्षित वर्गों को नियमानुसार अंकों में छूट देने की मांग भी रखी गई।

अभ्यर्थियों ने राज्यपाल को सौंपे गए अभ्यावेदनों और संबंधित पत्रों पर हुई कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक करने का अनुरोध किया। उन्होंने पूर्व नियमों के तहत पात्र नॉन-बीएड अभ्यर्थियों और प्राविधिक कला विषयों के बीएफए एवं एमएफए डिग्रीधारकों की पात्रता की समीक्षा कर उन्हें भर्ती में अवसर देने की मांग की।

ज्ञापन में टीजीटी के कार्यक्षेत्र को कक्षा 6 से 10 तक किए जाने के प्रभाव और जूनियर स्तर की भर्ती व्यवस्था की भी समीक्षा करने की मांग उठाई गई। प्रतिनिधिमंडल ने टीजीटी भर्ती में टीईटी की अनिवार्यता पर पुनर्विचार करने और इस भर्ती प्रक्रिया में इसे समाप्त करने का अनुरोध किया। इसके अतिरिक्त पूर्व नियमावली के अनुसार पूर्व सैनिकों, दिव्यांगों और स्वतंत्रता सेनानियों के लिए क्षैतिज आरक्षण लागू करने की मांग भी रखी गई।

प्रतिनिधिमंडल ने अखिलेश यादव से अनुरोध किया कि इन मुद्दों को विधानसभा और शासन स्तर पर उठाकर भर्ती नियमावली की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए। अभ्यर्थियों ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में सभी वर्गों को नियमानुसार अधिकार मिलना चाहिए और पात्र अभ्यर्थियों को अवसर उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

ज्ञापन सौंपने वालों में प्रयागराज के कौशल कुमार विश्वकर्मा, आनंद कुमार, सालू यादव, प्रदीप गुप्ता, किरन चौहान, सुनील यादव, चन्द्रजीत यादव, रामसेवक बिंद, अमित चौधरी, सुभाष पाल और मंजू मौर्य सहित अन्य अभ्यर्थी शामिल रहे।

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