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भारत की ‘पैड वुमन’ राखी गंगवार: एक शिक्षिका जिसने मासिक धर्म की चुप्पी को जागरूकता की आवाज में बदला

शिक्षा से समाज सेवा तक का सफर, ग्रामीण बेटियों और महिलाओं के स्वास्थ्य व सम्मान के लिए समर्पित एक प्रेरणादायी पहल

  • समय टुडे डेस्क।

बरेली। राखी गंगवार आज केवल एक सरकारी शिक्षिका नहीं, बल्कि ग्रामीण बेटियों और महिलाओं के बीच मासिक धर्म स्वच्छता एवं स्वास्थ्य जागरूकता की एक सक्रिय आवाज बन चुकी हैं। शिक्षा को कक्षा की चारदीवारी से बाहर निकालकर सामाजिक बदलाव से जोड़ने के उनके प्रयासों ने उन्हें ‘पैड वुमन राखी गंगवार’ की पहचान दी है।

राखी गंगवार का मानना है कि शिक्षक का दायित्व केवल विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम पढ़ाना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की नींव रखना भी है। इसी सोच के साथ उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों की किशोरियों और महिलाओं के बीच मासिक धर्म स्वच्छता, व्यक्तिगत स्वास्थ्य और जागरूकता को लेकर काम शुरू किया।

संघर्षों से बनी मजबूत पहचान

राखी गंगवार का जीवन संघर्ष, जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायी कहानी है। पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने BBA, MBA, MA और BTC जैसी शैक्षिक योग्यताएं हासिल कीं और बाद में सरकारी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका बनीं।

शिक्षिका बनने के बाद भी उन्होंने खुद को केवल नौकरी तक सीमित नहीं रखा। सिलाई, पेंटिंग और बुनाई जैसे कार्यों के माध्यम से भी उन्होंने कठिन परिस्थितियों में परिवार का सहयोग किया। यही संघर्ष आगे चलकर उनके सामाजिक जीवन की ताकत बना।

एक सर्वे ने बदल दी दिशा

ग्रामीण विद्यालय में कार्य करते हुए राखी गंगवार ने महसूस किया कि किशोरियों और महिलाओं के बीच मासिक धर्म को लेकर जानकारी का काफी अभाव है। कई महिलाएं और किशोरियां मासिक धर्म के दौरान पुराने या अनुपयुक्त कपड़ों का इस्तेमाल कर रही थीं। आर्थिक परेशानी के साथ सामाजिक झिझक, भ्रांतियां और सही जानकारी का अभाव भी बड़ी चुनौतियां थीं।

इस स्थिति ने राखी को कुछ अलग करने के लिए प्रेरित किया।

मदर्स डे पर शुरू हुआ ‘पैड बैंक’

15 मई, मदर्स डे के अवसर पर उन्होंने अपने विद्यालय में ‘पैड बैंक’ की शुरुआत की। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर किशोरियों और महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान सैनिटरी पैड उपलब्ध कराना और उन्हें सुरक्षित एवं स्वच्छ उपयोग की जानकारी देना था।

शुरुआत में राखी ने अपनी ओर से सैनिटरी पैड खरीदकर जरूरतमंद महिलाओं और बेटियों को उपलब्ध कराए। धीरे-धीरे उनकी पहल का दायरा बढ़ता गया और लोगों का सहयोग भी मिलने लगा।

उनकी पहल का संदेश रहा—“हमारी किशोरी, हमारी शक्ति।”

पैड बांटना नहीं, सोच बदलना है लक्ष्य

राखी गंगवार की मुहिम केवल सैनिटरी पैड के वितरण तक सीमित नहीं रही। उनका वास्तविक उद्देश्य मासिक धर्म से जुड़ी शर्म, झिझक और अंधविश्वास को दूर करना रहा।

शुरुआत में कई महिलाएं सैनिटरी पैड का इस्तेमाल करने से हिचकती थीं। उन्हें इसके उपयोग से स्वास्थ्य संबंधी नुकसान होने की आशंका रहती थी। राखी ने संवाद के माध्यम से उनकी शंकाओं को दूर किया और जरूरत पड़ने पर महिला चिकित्सकों से काउंसलिंग भी कराई।

धीरे-धीरे महिलाओं का विश्वास बढ़ा और वे मासिक धर्म स्वच्छता के महत्व को समझने लगीं। यही कारण है कि राखी की पहचान केवल पैड वितरित करने वाली कार्यकर्ता की नहीं, बल्कि Menstrual Hygiene Awareness Activist के रूप में बनी।

गांव से शुरू हुई मुहिम, हजारों महिलाओं तक पहुंची

राखी गंगवार की पहल धीरे-धीरे विद्यालय और गांव की सीमाओं से बाहर निकलती गई। 2024 में प्रकाशित एक विस्तृत प्रोफ़ाइल के अनुसार, उनकी मुहिम 55 गांवों में 20 हजार से अधिक ग्रामीण महिलाओं तक पहुंच चुकी थी। अभियान के तहत नियमित जागरूकता सत्र आयोजित किए गए और डॉक्टरों एवं काउंसलरों को भी इससे जोड़ा गया।

2025 में प्रकाशित रिपोर्टों में इस अभियान की पहुंच 85 गांवों तक बताए जाने के साथ मासिक धर्म स्वच्छता के अलावा लिकोरिया, स्तन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर जैसे महिला स्वास्थ्य विषयों पर जागरूकता का भी उल्लेख किया गया।

किशोरियों के लिए शिक्षा और आत्मविश्वास की मुहिम

राखी का मानना है कि किशोरियों को सही उम्र में सही जानकारी मिल जाए तो वे अपने स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक बन सकती हैं। इसलिए उनकी पहल में पैड वितरण के साथ किशोरियों से संवाद, व्यक्तिगत स्वच्छता, मासिक धर्म से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह उपलब्ध कराना भी शामिल रहा है।

उनकी कोशिश है कि कोई भी बेटी केवल जानकारी या आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण मासिक धर्म के दौरान स्कूल से दूर न हो।

‘कपड़ा मुक्त’ गांव की सोच

ग्रामीण क्षेत्रों में मासिक धर्म के दौरान कपड़े के इस्तेमाल को सामान्य मानने की स्थिति को बदलना भी राखी की मुहिम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। उन्होंने महिलाओं को स्वच्छ विकल्पों की जानकारी देने और सुरक्षित मासिक धर्म स्वच्छता अपनाने के लिए प्रेरित किया।

इसी सोच के साथ उन्होंने अपने गांव को ‘कपड़ा मुक्त’ बनाने का लक्ष्य भी सामने रखा।

मासिक धर्म स्वच्छता से महिला स्वास्थ्य तक

मासिक धर्म स्वच्छता से शुरू हुआ यह अभियान आगे चलकर महिलाओं के व्यापक स्वास्थ्य से भी जुड़ता गया। राखी ने ग्रामीण महिलाओं को लिकोरिया, स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर और अन्य महिला स्वास्थ्य संबंधी विषयों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया।

उनका संदेश रहा कि महिलाओं को अपने स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर चुप रहने के बजाय सही जानकारी हासिल करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

सम्मान मिला तो जिम्मेदारी भी बढ़ी

राखी गंगवार को उनके सामाजिक कार्य और मासिक धर्म स्वच्छता अभियान के लिए सम्मान भी प्राप्त हुए हैं। मार्च 2025 में लखनऊ में आयोजित नारी शक्ति सम्मान समारोह में उन्हें ‘पैड वुमन राखी गंगवार’ के रूप में सम्मानित किए जाने का उल्लेख मिलता है।

2026 में प्रकाशित रिपोर्टों में उन्हें श्रेष्ठ शिक्षक सम्मान-2025 के लिए चयनित किए जाने की जानकारी भी सामने आई। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, देशभर से लगभग 45 हजार आवेदन आए थे और 40 शिक्षकों का चयन किया गया था।

राखी गंगवार की पहल क्यों है अलग?

राखी गंगवार की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने किसी बड़े संस्थान या बड़े संसाधन का इंतजार नहीं किया। उन्होंने अपने विद्यालय, अपनी सोच और व्यक्तिगत प्रयास से शुरुआत की।

उनकी कहानी बताती है कि सामाजिक बदलाव के लिए हमेशा बड़ी संस्था या बड़े संसाधनों की आवश्यकता नहीं होती। कभी-कभी एक संवेदनशील शिक्षक, छोटी-सी पहल और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी बड़ा परिवर्तन ला सकती है।

उन्होंने यह साबित किया कि एक शिक्षिका केवल पाठ्यपुस्तक नहीं बदलती, बल्कि पूरी पीढ़ी की सोच बदल सकती है।

‘पैड वुमन राखी गंगवार’ अब एक पहचान से बढ़कर अभियान

आज ‘पैड वुमन राखी गंगवार’ नाम मासिक धर्म स्वच्छता, किशोरी जागरूकता और ग्रामीण महिला स्वास्थ्य से जुड़े प्रयासों के साथ जुड़ चुका है।

उनका स्पष्ट संदेश है कि मासिक धर्म शर्म का विषय नहीं, बल्कि स्वास्थ्य का विषय है। बेटियों को चुप कराने के बजाय उन्हें सही जानकारी और सुरक्षित विकल्प उपलब्ध कराना जरूरी है।

बरेली की एक सरकारी शिक्षिका से शुरू हुई यह यात्रा हजारों ग्रामीण महिलाओं और किशोरियों तक पहुंचने की कोशिश में बदल चुकी है। राखी गंगवार का लक्ष्य है कि आने वाली पीढ़ी मासिक धर्म को लेकर झिझके नहीं, परिवारों में इस विषय पर खुलकर संवाद हो और हर किशोरी अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बने।

यही सोच राखी गंगवार को ‘पैड वुमन’ की पहचान देती है और उनकी पहल को एक महत्वपूर्ण सामाजिक जागरूकता अभियान का रूप देती है।

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