भाजपा नेताओं ने विदेशी संगठनों से कथित संपर्क पर उठाए सवाल, कांग्रेस पर राजनीतिक आंदोलनों के समन्वय के आरोप; विदेशी साजिश के दावों के समर्थन में स्वतंत्र रूप से सत्यापित सबूत नहीं किए गए पेश
- सोनाली सिंह
नई दिल्ली। भारत में विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों और विदेशी संगठनों के कथित संपर्क को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई नेताओं ने कांग्रेस और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर विदेशी संगठनों के साथ कथित संबंधों को लेकर सवाल उठाए हैं। भाजपा नेताओं का आरोप है कि कुछ अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क भारत में राजनीतिक आंदोलनों को प्रभावित करने और सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में स्वतंत्र रूप से सत्यापित सबूत सार्वजनिक रूप से पेश किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है।
निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर उठाए सवाल
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी के अमेरिकी सांसदों इल्हान उमर और रो खन्ना से कथित संपर्कों का मुद्दा उठाया। उन्होंने विदेशी फंडिंग, क्रिप्टोकरेंसी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और ऑनलाइन जुए से जुड़े नेटवर्क की संभावित भूमिका पर भी सवाल किए।
दुबे ने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी संगठन और व्यक्ति भारत में राजनीतिक बदलाव के लिए विरोध प्रदर्शनों को प्रभावित करने का प्रयास कर सकते हैं। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व के विदेशी तत्वों से कथित संबंधों पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी की विदेश यात्राओं के दौरान हुई मुलाकातों का विवरण मांगा।
भाजपा सांसद ने अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस से जुड़े संगठनों और अमेरिकी सांसदों के साथ कथित संपर्क का भी उल्लेख किया। इसके अलावा, उन्होंने नेविल रॉय सिंघम और कुछ अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के संबंध में कांग्रेस से स्पष्टीकरण मांगा। हालांकि, उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
प्रदीप भंडारी ने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का किया जिक्र
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक कथित खोजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल नामक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क विभिन्न देशों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान संदेशों के समन्वय में भूमिका निभा रहा था।
भंडारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और इस संगठन के प्रतिनिधियों के बीच हुई कथित बैठकों से विदेशी प्रभाव को लेकर सवाल उठते हैं। उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि क्या पार्टी ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान इस नेटवर्क के साथ संवाद या समन्वय किया था।
भाजपा प्रवक्ता के ये आरोप राजनीतिक बहस का हिस्सा हैं। इनके आधार पर विदेशी संगठनों द्वारा भारत में विरोध प्रदर्शनों को संचालित करने की बात को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
गौरव भाटिया ने भी कांग्रेस को घेरा
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने भी इस मुद्दे पर कांग्रेस नेतृत्व की आलोचना की। उन्होंने विदेशी संगठनों के साथ कथित संपर्क, वित्तपोषण और भारत में राजनीतिक गतिविधियों के संभावित समन्वय को लेकर सवाल उठाए।
भाटिया ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि नौ देशों में 101 संगठनों की पहचान की गई है, जो विरोध प्रदर्शनों के आयोजन, समन्वय या प्रचार से जुड़े थे। उन्होंने प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल और इंडियन अलायंस पेरिस जैसे संगठनों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस से उनके साथ संबंधों की प्रकृति स्पष्ट करने की मांग की।
उन्होंने कांग्रेस के सोशल मीडिया पोस्ट का भी जिक्र किया, जिसके अनुसार सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने 28 अप्रैल 2025 को नई दिल्ली स्थित 10 जनपथ पर प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। हालांकि, किसी संगठन के प्रतिनिधियों से मुलाकात होना अपने आप में गैरकानूनी गतिविधि या विरोध प्रदर्शनों के संचालन का प्रमाण नहीं है।
अनुराग ठाकुर ने विदेशी प्रभाव का मुद्दा उठाया
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने भी विपक्ष पर आरोप लगाया कि कुछ नेता विदेशी हितों से प्रभावित होकर भारत के खिलाफ बयान दे रहे हैं। उन्होंने विदेशी नेटवर्क, राजनीतिक संदेशों और कथित टूलकिट के इस्तेमाल का मुद्दा उठाते हुए विपक्ष की भूमिका पर सवाल किए।
ठाकुर ने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी तत्व राजनीतिक आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने विपक्षी नेताओं पर देश के हितों के विरुद्ध एजेंडा चलाने का आरोप भी लगाया। ये आरोप भाजपा नेताओं के राजनीतिक दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के बीच बढ़ा विवाद
यह राजनीतिक विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भी राजनीतिक बहस जारी है।
भाजपा नेताओं ने इन घटनाओं को विदेशी नेटवर्क के कथित प्रभाव से जोड़ने की कोशिश की है, जबकि उनके आरोपों के समर्थन में स्वतंत्र रूप से सत्यापित प्रमाणों का अभाव एक महत्वपूर्ण पहलू है। मामले में कांग्रेस का विस्तृत पक्ष और संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस विवाद की वास्तविक स्थिति समझने के लिए महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल, विदेशी संगठनों के कथित हस्तक्षेप और विपक्षी प्रदर्शनों के बीच संबंध को लेकर भाजपा के आरोपों ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। इस पूरे मामले में आरोपों, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तथ्यों और प्रमाणित निष्कर्षों के बीच अंतर करना जरूरी है।


