HomeNEWSमानस संगम के मंच पर भव्य तुलसी जयंती समारोह, रामचरितमानस को युवाओं...

मानस संगम के मंच पर भव्य तुलसी जयंती समारोह, रामचरितमानस को युवाओं से जोड़ने पर जोर

तुलसी उपवन ने आध्यात्मिक विरासत को सहेजकर रखा : डॉ. दिनेश शर्मा

  • हरिओम गुप्ता

कानपुर नगर। अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक संस्था ‘मानस संगम’ द्वारा मोतीझील स्थित तुलसी उपवन में 45वां तुलसी जयंती समारोह श्रद्धा, साहित्य और सांस्कृतिक चेतना के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में साहित्य, राजनीति और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख लोगों ने शिरकत की।

तुलसी उपवन के मुख्य द्वार पर राघव नारायण तिवारी ने मुख्य अतिथि एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश डॉ. दिनेश शर्मा सहित अन्य अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया।

रामचरितमानस ने हिंदू संस्कृति को सुरक्षित रखा : दिनेश शर्मा

मुख्य अतिथि डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस के माध्यम से कश्मीर से कन्याकुमारी तक भगवान श्रीराम के आदर्शों को घर-घर पहुंचाने का कार्य किया। उन्होंने तुलसी उपवन को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए कहा कि मानस संगम परिवार द्वारा तुलसी की स्मृतियों को जीवंत रखने का प्रयास सराहनीय है।

उन्होंने कहा कि रामचरितमानस ने हिंदू संस्कृति को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज आवश्यकता केवल मानस के विश्लेषण की नहीं, बल्कि नई पीढ़ी और युवाओं को रामचरितमानस के मूल्यों से जोड़ने की भी है। उन्होंने सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए परिवार और सामाजिक मूल्यों को मजबूत करने पर जोर दिया।

डॉ. दिनेश शर्मा ने तुलसी उपवन को पर्यटन सर्किट से जोड़ने की मांग को भी सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1998 में उनके द्वारा पर्यटन नीति में इस प्रकार की सर्किट श्रृंखला की योजना बनाई गई थी।

मानस संगम ने रामायण के पात्रों को जीवंत किया : दयाशंकर मिश्र

उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा उपवन पहले नहीं देखा। उन्होंने कहा कि मानस संगम ने यहां रामायण के विभिन्न पात्रों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया है। उन्होंने तुलसीदास जी से जुड़े काशी के स्थलों का भी उल्लेख किया।

तुलसीदास सामाजिक समरसता के प्रतीक : नीलिमा कटियार

कल्याणपुर विधायक नीलिमा कटियार ने कहा कि तुलसीदास जी सामाजिक समरसता के प्रतीक थे। उन्होंने स्वर्गीय बद्री नारायण तिवारी के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके संस्कारों ने कानपुर की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मानस से मिलते हैं जीवन के आदर्श : अरुण पाठक

एमएलसी अरुण पाठक ने रामचरितमानस को सनातन धर्म का जीवंत दर्शन बताते हुए कहा कि मानस के प्रत्येक पात्र से जीवन के लिए महत्वपूर्ण सीख ली जा सकती है। उन्होंने सीता से धैर्य, उर्मिला से त्याग, मंदोदरी से दूरदृष्टि और शबरी से भक्ति जैसे आदर्शों का उल्लेख किया।

सांसद रमेश अवस्थी ने कहा कि रामचरितमानस मानव चरित्र के निर्माण की प्रेरणा देता है। निजी जीवन हो या सार्वजनिक जीवन, मानस के आदर्श हमेशा मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

सांसद रमेश अवस्थी को विशेष सम्मान

कार्यक्रम के दौरान कानपुर के पद्मश्री श्यामलाल गुप्त द्वारा रचित झंडा गीत को राष्ट्रीय गौरव दिलाने की दिशा में किए गए प्रयास के लिए सांसद रमेश अवस्थी को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। बताया गया कि सांसद द्वारा 9 अगस्त 2026 को ‘राष्ट्रीय ध्वज गीत विधेयक’ लोकसभा में प्रस्तुत किया गया था।

इसके अलावा लोकगीत एवं पारंपरिक गायन के क्षेत्र में योगदान के लिए कविता सिंह को ‘डॉ. बद्री नारायण तिवारी स्मृति सम्मान-2026’ से नवाजा गया।

कार्यक्रम में कविवर दीन मोहम्मद दीन, कवि दिलीप दुबे और कवि अनिल दीक्षित ने काव्य प्रस्तुतियां दीं। इस दौरान अभिनव नारायण तिवारी ने श्री वेणु रंजन भदौरिया, भाजपा कानपुर अध्यक्ष अनिल दीक्षित, एमएलसी अरुण पाठक एवं विधायक नीलिमा कटियार को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

कार्यक्रम का संयोजन विजय नारायण तिवारी ‘मुकुल’ ने किया, जबकि संचालन डॉ. प्रदीप दीक्षित एवं मनोज सेंगर ने किया। समारोह में प्रभाकर श्रीवास्तव, राजेश पाठक, गौरव पाठक, एडवोकेट जीतेन्द्र सिंह, डॉ. रमेश वर्मा, अनिल कुमार शर्मा, मुकेश श्रीवास्तव, सुनील दुबे, उमंग अग्रवाल, श्याम अरोड़ा, डॉ. बीना सिंह, डॉ. बीएन त्रिपाठी, अरुण कुमार मिश्रा, संजय बाजपेई, अशोक मिश्रा, संजय त्रिवेदी, रजोल शुक्ला, सुरेश गुप्ता, अभिनव तिवारी, सतीश तिवारी, रामगोपाल सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments