वर्ल्ड कंडोम डे: कंडोम से जुड़े 4 आम मिथक और उनकी सच्चाई
- समय टुडे डेस्क।
कंडोम के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 13 फरवरी को वर्ल्ड कंडोम डे मनाया जाता है। इसके बावजूद आज भी समाज में कंडोम को लेकर कई गलतफहमियां और मिथक मौजूद हैं। सही जानकारी के अभाव में लोग या तो इसका उपयोग करने से हिचकते हैं या गलत तरीके से इस्तेमाल करते हैं, जिससे अनचाही प्रेग्नेंसी और यौन संचारित रोगों का खतरा बढ़ सकता है। दिल्ली स्थित एलांटिस हेल्थ केयर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. मनन गुप्ता ने ऐसे ही कुछ आम मिथकों की सच्चाई बताई।
मिथक 1: कंडोम 100% सुरक्षित नहीं, इसलिए बेकार हैं
सच्चाई: विशेषज्ञों के अनुसार, सही तरीके से इस्तेमाल किए जाने पर कंडोम अनचाही प्रेग्नेंसी से करीब 98% तक सुरक्षा देते हैं। साथ ही यह HIV, गोनोरिया, सिफिलिस समेत कई यौन संचारित संक्रमणों से बचाव में भी प्रभावी हैं। गलत तरीके से उपयोग या एक्सपायरी डेट वाले कंडोम के इस्तेमाल से जोखिम बढ़ सकता है।
मिथक 2: कंडोम केवल पुरुषों के लिए होते हैं
सच्चाई: आज बाजार में फीमेल कंडोम भी उपलब्ध हैं, जो महिलाओं को भी सुरक्षित विकल्प प्रदान करते हैं। इनके इस्तेमाल से संक्रमण का खतरा कम करने में मदद मिलती है।
मिथक 3: कंडोम से एलर्जी होती है
सच्चाई: विशेषज्ञ बताते हैं कि कंडोम से हर किसी को एलर्जी नहीं होती। केवल उन लोगों में समस्या हो सकती है जिन्हें लेटेक्स से एलर्जी होती है। ऐसे लोगों के लिए लेटेक्स-फ्री कंडोम भी बाजार में मौजूद हैं।
मिथक 4: सभी के लिए कंडोम का एक ही साइज होता है
सच्चाई: कंडोम अलग-अलग साइज, शेप और टेक्सचर में उपलब्ध होते हैं। सही फिट वाला कंडोम चुनना जरूरी है, क्योंकि बहुत छोटा होने पर फटने और बहुत बड़ा होने पर फिसलने का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कंडोम खरीदते समय सही साइज और ब्रांड के बारे में जानकारी लेना जरूरी है। यदि फिट को लेकर भ्रम हो तो अलग-अलग वैरायटी पैक ट्राई किए जा सकते हैं।
नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय के लिए विशेषज्ञ या चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।



