
‘मानसिक स्वास्थ्य की अदालत’ नाटिका के जरिए छात्राओं ने दिया संवेदनशीलता का संदेश, कहा- लोगों को समाधान देने से पहले उनकी बात सुनना जरूरी
- हरिओम गुप्ता
कानपुर नगर। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2026 के अवसर पर दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज, कानपुर के मनोविज्ञान विभाग की ओर से आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के तत्वावधान में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कॉलेज की प्राचार्या प्रो. वंदना निगम के मार्गदर्शन में हुए इस कार्यक्रम में निदेशक प्रो. अर्चना वर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मिथकों को दूर करना और लोगों के भावनात्मक अनुभवों को संवेदनशीलता के साथ सुनने के महत्व को समझाना था। कार्यक्रम का संचालन डॉ. वंदना द्विवेदी ने किया।
कार्यक्रम के अंतर्गत मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मिथकों और तथ्यों पर आधारित क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसका संचालन मनोविज्ञान विभाग की सहायक आचार्य अपूर्वा बाजपेयी ने किया। क्विज के माध्यम से छात्राओं को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने और इससे जुड़ी गलत धारणाओं को दूर करने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘मानसिक स्वास्थ्य की अदालत’ शीर्षक से प्रस्तुत नाटिका रही। एमए प्रथम सेमेस्टर की छात्राओं रुश्दा, अबीर और सिदरा ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक कलंक और भावनात्मक कठिनाइयों को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा। नाटिका के जरिए यह संदेश दिया गया कि मानसिक परेशानियों से जूझ रहे लोगों को समझने, उनकी भावनाओं का सम्मान करने और उनकी बात ध्यानपूर्वक सुनने की आवश्यकता है।
नाटिका में “Listen, Don’t Just Fix” यानी “सुनिए, केवल समाधान देने की कोशिश मत कीजिए” संदेश को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। इसके माध्यम से बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे व्यक्ति को हर बार सलाह या समाधान की जरूरत नहीं होती, बल्कि कई बार उसकी बात को धैर्यपूर्वक सुनना और उसकी भावनाओं को समझना ही सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. सुषमा शर्मा, डॉ. शिप्रा श्रीवास्तव और श्रीमती ज्योति गुप्ता का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इसके अलावा प्राणीशास्त्र विभाग की प्रभारी प्रो. अंजलि श्रीवास्तव, समाजशास्त्र विभाग की प्रभारी डॉ. दीपिका और अर्थशास्त्र विभाग की प्रभारी डॉ. साधना ने सक्रिय सहभागिता की और कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं और उपस्थित लोगों को यह संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील समाज का निर्माण तभी संभव है, जब लोगों के अनुभवों को गंभीरता से सुना जाए, उनकी भावनाओं को समझा जाए और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक कलंक एवं भेदभाव को दूर करने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएं।


