सब दौलत से तुल सकता है लेकिन ये अपवाद रहेगी ……….

सब दौलत से तुल सकता है लेकिन ये अपवाद रहेगी।
कविता जिंदाबाद रही है,,,,,,, कविता जिंदाबाद रहेगी।।
छद्म छलावे,परपंचों से थोड़ा सा घबरा सकती है।
कुटिल नीतियों वाले आडम्बर से धोखा खा सकती है।
चर्चित, टुच्चे चंद चुटकुलों से अक्सर ही युद्ध ठनेंगे,
लटके झटकों के आगे शरमा कर पीछे जा सकती है।
लेकिन जब अधरों पर होगी,,ख़ुशबू सी आबाद रहेगी।
कविता जिंदाबाद रही है ,,,,,,,कविता जिंदाबाद रहेगी।।
कवि दरबारी हो सकता है लेकिन कविता मुक्त रही है।
अस्त-व्यस्त मंचों पर भी ये अलंकार से युक्त रही है।
चाटुकारिता का इंजेक्शन रोग निवारण नही करेगा,
कविता अमृत जैसी है ये हर मौसम उपयुक्त रही है।
ये बंधन में नही बंधेगी ,,,सदियों तक आजाद रहेगी।
कविता जिंदाबाद रही है,,,, कविता जिंदाबाद रहेगी।।
स्वाभिमान नभ सा लेकर धरनी सा धीरज रखने वाली।
जग की पीड़ा को समेटकर स्वाद अश्रु का चखने वाली।
स्वर,व्यंजन,व्याकरण,वर्तनी को जीवन भर रखा गर्भ में,
दुनिया का तूफ़ान समेटे,,,,,, शांत लहर सी दिखने वाली।
कठिन परिस्थितियों में जन के भावों का संवाद रहेगी।।
कविता जिंदाबाद रही है ,,,,,,,,,,,,,कविता जिंदाबाद रहेगी।।
कविता जिंदाबाद

लखनऊ, उत्तर प्रदेश


