सियाचिन में हिमस्खलन: तीन भारतीय सैनिक शहीद

- समय टुडे डेस्क।
लेह। सियाचिन ग्लेशियर में रविवार, 7 सितंबर को भारतीय सेना का एक शिविर हिमस्खलन की चपेट में आ गया। इस हादसे में तीन सैनिक शहीद हो गए। सेना के फायर एंड फ्यूरी कोर ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर शहीद जवानों—सिपाही मोहित कुमार, अग्निवीर नीरज कुमार चौधरी और अग्निवीर दभी राकेश देवभाई—को नमन करते हुए परिवारजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
सियाचिन विश्व का सबसे ऊँचा और सबसे कठिन युद्धक्षेत्र है। यहाँ भारत, पाकिस्तान और चीन की सीमाएँ मिलती हैं। अनुमान है कि एक ब्रिगेड (करीब 5,000 सैनिक) को यहाँ तैनात रखने में रोज़ाना लगभग 6 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। स्थानीय बाल्टी भाषा में सियाचिन का अर्थ “गुलाबों का स्थान” होता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1949 के कराची समझौते के बाद से सियाचिन भारत-पाकिस्तान के बीच विवादित क्षेत्र रहा है। 1984 में भारत ने ऑपरेशन मेघदूत के तहत रणनीतिक चोटियों पर कब्ज़ा कर पाकिस्तान की साजिश को नाकाम किया था। यह अभियान लेफ्टिनेंट जनरल मनोहर लाल छिब्बर, लेफ्टिनेंट जनरल पी.एन. हून और मेजर जनरल शिव शर्मा के नेतृत्व में चलाया गया और भारतीय वायुसेना व थलसेना के बेहतरीन तालमेल का उदाहरण बना।
सामरिक महत्व
सियाचिन का भूगोल इतना अहम है कि यह उत्तर में शक्सगाम घाटी, पश्चिम में गिलगित-बाल्टिस्तान से लेह तक के मार्ग और पूर्व में काराकोरम दर्रे पर भारत की पकड़ सुनिश्चित करता है। यही वजह है कि यहाँ हर परिस्थिति में भारतीय सेना की मौजूदगी आवश्यक मानी जाती है।



