दिल्ली विस्फोट मामले में माधव खुराना होंगे विशेष लोक अभियोजक, केंद्र ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

- नेहा पाठक
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने दिल्ली कार विस्फोट मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता माधव खुराना को विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) नियुक्त किया है। वे तीन वर्षों तक या मुकदमे के पूरा होने तक एनआईए विशेष अदालत और दिल्ली हाईकोर्ट में एजेंसी की पैरवी करेंगे। 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए इस धमाके में 15 लोगों की मौत और कई लोग घायल हुए थे।
गृह मंत्रालय की अधिसूचना में बताया गया है कि खुराना को एनआईए की ओर से आरसी-21/2025/एनआईए/डीएलआई मामले में सभी कानूनी कार्यवाही का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई है।
अब तक 7 आरोपी गिरफ्तार, कई राज्यों में छापेमारी जारी
एनआईए ने अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके निशानदेही पर एजेंसी को हमले के पीछे सक्रिय नेटवर्क की अहम जानकारी मिली है।
हाल में फरीदाबाद के धौज निवासी सोयब को गिरफ्तार किया गया, जिस पर आत्मघाती हमलावर उमर उन नबी को पनाह देने और रसद सहायता उपलब्ध कराने का आरोप है।
20 नवंबर को एजेंसी ने
- शाहीन सईद
- डॉ. मुज़म्मिल शकील गनई (पुलवामा)
- डॉ. अदील अहमद राथर (अनंतनाग)
- मुफ़्ती इरफ़ान अहमद वागे (शोपियां)
को हिरासत में लिया। इससे पहले
- आमिर राशिद अली (जिसके नाम पर कार पंजीकृत थी)
- जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश (तकनीकी सहायता देने का आरोप)
को गिरफ्तार किया जा चुका है।
विस्फोट में इस्तेमाल कार और 2,900 किलो विस्फोटक बरामद
एनआईए की जांच में सामने आया है कि फरीदाबाद से हाल ही में लगभग 2,900 किलो विस्फोटक बरामद हुए थे। विस्फोट में इस्तेमाल हुई हुंडई i20 कार भी इसी क्षेत्र के एक डीलर से मिली थी।
फोरेंसिक जांच में कार चलाने वाले मृतक की पहचान उमर के रूप में हुई है, जो पुलवामा का निवासी और फरीदाबाद के अल फलाह विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर था।
कई राज्यों में तलाशी, डिजिटल डिवाइस और नकदी बरामद
1 दिसंबर को एनआईए ने जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश में आठ ठिकानों पर छापेमारी की, जहां से डिजिटल उपकरण और अन्य आपत्तिजनक सामग्री मिली।
इसके अलावा, 26–27 नवंबर को अल फलाह विश्वविद्यालय और फरीदाबाद में की गई छापेमारियों में नकदी, विदेशी मुद्रा, सोना और महत्वपूर्ण दस्तावेज ज़ब्त किए गए।
जाँच में 73 गवाहों से पूछताछ
एनआईए ने अब तक 73 गवाहों से पूछताछ की है, जिनमें विस्फोट में घायल लोग भी शामिल हैं।
एजेंसी दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, यूपी पुलिस और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।



