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भारतीय संस्कृति और नई शिक्षा नीति पर राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में डॉ. मेघना का महत्वपूर्ण वक्तव्य

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: समग्र विकास और भारतीय परंपरा का पुनर्जीवन

  • अभिषेक कुमार

बीकानेर। बीकानेर स्थित महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. मेघना शर्मा ने सरदारशहर के कमलादेवी गौरीदत्त मित्तल महिला पीजी महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में मुख्य वक्ता के रूप में महत्वपूर्ण संदेश दिया। यह कार्यक्रम भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित था और इसका उद्देश्य नई शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से भारतीय संस्कृति के संवर्धन की दिशा में कदम बढ़ाना था।

डॉ. मेघना शर्मा ने अपने बीज वक्तव्य में कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति एक जीवंत दस्तावेज है, जिसने समग्र विकास को पुनर्जीवित करने का व्यापक संकल्प लिया है। उन्होंने बताया कि इस नीति के तहत शिक्षा प्राप्त नई पीढ़ी आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में प्रभावी योगदान देगी।

भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता

अपने वक्तव्य में डॉ. मेघना ने प्राचीन भारतीय इतिहास और ज्ञान परंपरा से उदाहरण प्रस्तुत करते हुए इसे पढ़ाए जाने के औचित्य और आधुनिक शिक्षा में इसकी प्रासंगिकता पर जोर दिया।

सम्मान और मंचस्थ शिक्षाविदों की उपस्थिति

कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. मेघना का विस्तृत परिचय उद्घोषिका डॉ. रश्मि गौड़ द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसके उपरांत, कॉन्फ्रेंस संयोजक डॉ. मयंक गुप्ता, प्राचार्य डॉ. मृत्युंजय पारीक, और प्रबंधन पक्ष के महेश पंसारी ने डॉ. मेघना को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। मंचस्थ अन्य शिक्षाविदों में प्रो. योगेंद्र सिंह और डॉ. जी. डी. सिंह शामिल रहे।

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