कानपुर के सरकारी अस्पताल में लगेंगे AI-स्मार्ट बेड, मरीज की हालत बिगड़ने से पहले मिलेगा अलर्ट

GSVM मेडिकल कॉलेज और हैलट अस्पताल में हाई-टेक सुविधा की शुरुआत
- मनीष कुमार
कानपुर नगर। कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज और संबद्ध हैलट अस्पताल में अब मरीजों की निगरानी पूरी तरह हाई-टेक होने जा रही है। अस्पताल प्रशासन AI-पावर्ड स्मार्ट बेड लगाने की तैयारी में है, जो मरीज की स्थिति बिगड़ने से पहले ही डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को अलर्ट भेज देंगे।
अस्पताल में शुरुआती चरण में लगभग 30 AI-स्मार्ट बेड लगाए जाएंगे। ये बेड ‘मेक इन इंडिया’ के तहत विकसित स्वदेशी तकनीक पर आधारित हैं और CSR फंड से स्थापित किए जा रहे हैं। प्रत्येक बेड की कीमत करीब 5 लाख रुपये बताई जा रही है।
इन स्मार्ट बेड्स में मैट्रेस के नीचे लगे सेंसर शीट के जरिए मरीज के शरीर की सूक्ष्म गतिविधियों की निगरानी की जाएगी। यह तकनीक बैलिस्टोकार्डियोग्राफी पर आधारित है, जो शरीर की हर धड़कन, सांस और मूवमेंट को रिकॉर्ड करती है। AI एल्गोरिदम इन आंकड़ों का विश्लेषण कर हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन लेवल जैसे महत्वपूर्ण संकेतों पर लगातार नजर रखता है।
अगर मरीज के स्वास्थ्य संकेतों में कोई असामान्य बदलाव होता है, तो डॉक्टर और नर्स के मोबाइल या टैबलेट पर तुरंत अलार्म बज जाएगा। यह अलर्ट संभावित खतरे से करीब 2 घंटे पहले भी मिल सकता है, जिससे समय रहते इलाज शुरू किया जा सकेगा।
अस्पतालों में अक्सर ‘कोड ब्लू’ की स्थिति अचानक बनती है, जब मरीज की हालत तेजी से बिगड़ती है। ऐसे में समय पर उपचार न मिलने से जान का खतरा बढ़ जाता है। AI-स्मार्ट बेड इस स्थिति को पहले ही पहचानकर मेडिकल टीम को सचेत कर देंगे, जिससे मरीज की जान बचाने की संभावना बढ़ेगी।
इस तकनीक से नर्सिंग स्टाफ पर भी बोझ कम होगा, क्योंकि हर समय मैन्युअल निगरानी की जरूरत नहीं रहेगी। स्मार्ट सिस्टम लगातार रिपोर्ट तैयार करता रहेगा, जिससे मरीजों को बेहतर और समय पर देखभाल मिल सकेगी।
अस्पताल प्रशासन का मानना है कि यह पहल सरकारी अस्पतालों में हाई-टेक स्वास्थ्य सेवाओं की नई शुरुआत साबित होगी। इससे न केवल इलाज की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि गंभीर मरीजों की अनावश्यक मौतों को भी काफी हद तक रोका जा सकेगा।


