HomeAstrology"ज्योतिष और अंकशास्त्र का बढ़ रहा है महत्त्व" (भाग - 8 )

“ज्योतिष और अंकशास्त्र का बढ़ रहा है महत्त्व” (भाग – 8 )

अंकशास्त्र के जनक यूनान के प्रसिद्ध अंकशास्त्री पाइथागोरस थे। इनके ही कारण अंक ज्योतिष भारत सहित एशिया के कई देशों में काफी तेजी से विकसित हो गया। लेकिन भारतीयों ने जो तत्कालीन समय में वैदिक ज्योतिष के अच्छे खासे जानकार रहे, उन्होने यूनानी अंकशास्त्र की मूल पद्धति में वैदिक ज्योतिष पर आधारित अपने शोध, अनुभव को भी शामिल करके विभिन्न प्रकार की गणना, परिभाषा अंकशास्त्र में शामिल कर दी और इससे एक नये भारतीय अंकशास्त्र का उद्भव हुआ जिससे अंकशास्त्र के माध्यम से विश्लेषण करना कहीं अधिक सरल और प्रभावपूर्ण होता चला गया। वर्तमान में, अनुभव के आधार पर अंकशास्त्र विद्या में कई तरह के शोध हो रहे हैं। नवीन शोधों के साथ अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध हैं। क्यूंकि अब इसमें वैदिक ज्योतिष शास्त्र का भी मिश्रण करते हुये अध्ययन किया जाने लगा है। जो मूल यूनानी अंकशास्त्र से कहीं अधिक सटीक व सार्थक साबित होता है। वर्तमान में वैदिक ज्योतिष, अंकशास्त्र को मानने वाले लोगों की संख्या में दिन प्रतिदिन वृद्धि होती जा रही है। अब दोनों ही प्रकार की पारम्परिक व प्राचीन विधाओं से लोग विश्लेषण करवाना और अपने जीवन को मार्गदर्शित करना आवश्यक समझते हैं। लेकिन सटीक और सार्थक विश्लेषण भी तभी संभव है जब दोनों ही विद्याओं के जानकार के पास अच्छा मार्गदर्शन करने के साथ इन शास्त्रों में निजी अनुभव, शोधकार्य भी बहुत मजबूती से किया गया हो। क्यूंकि किसी शोध के बिना दोनों ही विधायें अधूरी हैं, अपर्याप्त हैं। फलित (prediction) किस प्रकार से किया जाये, क्या लिखकर दिया जाये, उसका तरीका किसी भी ज्योतिष, अंकशास्त्र की पुस्तक में नहीं लिखा होता है। फलित को जितना बेहतर कोई व्यक्ति अपने शोध से बना सकता है और उसे अपने अनुभव से बाहर निकाल सकता है, वह केवल इन विधाओं में की गई वर्षों की मेहनत के द्वारा ही सम्भव है। अन्यथा उसका कोई तरीका किसी भी महँगी से महँगी पुस्तक में शामिल नहीं होता है।

•अंकशास्त्र की उपयोगिता— देखा जाये तो अंकशास्त्र का प्रयोग जीवन में अधिकांश लोग करते हैं। मकान, मोबाइल के लकी नम्बर से लेकर वाहन, नामाक्षर चयन आदि में कर रहे हैं। कई लोग मेरे पास ऐसे भी आये हैं जिन्होने अंकशास्त्र के आधार पर अपने नाम, व्यवसायिक उपक्रम में नाम परिवर्तन करने का परामर्श लिया है और इस प्रकार के कार्य के लिए ज्योतिष और अंकशास्त्र दोनों ही पद्धतियों के माध्यम से इस विश्लेषण को सम्पूर्ण करने का मेरा अनुभव, शोध अभीतक सफल ही रहा है। अंकशास्त्र में 1 से 9 तक संख्या दी गयी हैं। जिनके आधार पर ही अंकशास्त्र आरम्भ होता है। इन अंकों पर भिन्न-भिन्न ग्रहों का स्वामित्व (lordship of planet) होता है। जैसे– 1 सूर्य, 2 चन्द्रमा, 3 बृहस्पति, 4 राहु, 5 बुध, 6 शुक्र, 7 केतु, 8 शनि एवं 9 मंगल इन ग्रहों के प्रभाव को देखते हुये ही विश्लेषण करने का प्रयास किया जाता है।

•इसके आधार पर ही आज अंक 8 के विषय में फलित किया जा रहा है। पिछ्ले भाग में हम अंक 1 से 7 तक विश्लेषण कर चुके हैं। यह लेख जिनका जन्म 8, 17, 26 तारीख में हुआ है वह लोग पढ़ें। इन तारीखों में जन्मे व्यक्तियों का जन्मांक 8 होता है। जैसे- अंक 17 को आपस में जोड़े तो 8 अंक बनेगा। अंक 8 का स्वामित्व शनि ग्रह के अधीन है। जिनका जन्म 8 तारीख में हुआ है उन पर शनि ग्रह अपना पूर्ण प्रभाव रखते हैं। इस अंक की विशेषता यह है कि इनके जीवन का शुरुआती समय काफी चुनौतियों से भरा हुआ देखा जा सकता है। असल में शनि एक तटस्थ, एकाकी, कठोर जीवन देने वाले व अनुशासन प्रिय ग्रह हैं जिसके कारण इस जन्मांक के व्यक्ति का जीवन काफी अनुशासन, संघर्ष और घड़ी की सूई के समान आगे बढ़ता है। जैसे-जैसे इनकी आयु बढ़ती है तो इनके जीवन में काफी बड़े परिवर्तन होने लगते हैं। यह अंक जीवन में अधिक मेहनत के बाद ही किस्मत खोलता है। इस अंक में जन्मे व्यक्ति अपनी माता व ननिहाल से जुड़े रहते हैं और कुछ विशेष मामले में इनकी माता या इनके ननिहाल में किसी को गम्भीर स्वास्थ्य समस्याएँ होती रहती हैं। जीवन में कठोरतम उतार चढ़ाव अनुभव करने के कारण ये काफी स्वार्थी व सीमित हो जाते हैं। यह तकनीकी शिक्षा, बिल्डिंग मटीरियल, प्रॉपर्टी डीलर, कानून से जुड़े कार्य करते देखे जा सकते हैं। इनकी सफलता कुंडली में शनि ग्रह की स्थिति के अनुकूल होने पर अधिक निर्भर करती है। जन्मांक 17 का प्रभाव सूर्य, केतु व शनि के अधीन है। यह तीनों ग्रह इस अंक में जन्मे व्यक्ति को शुरूआत में बेहद उतार चढ़ाव देकर बाद में विशेष बना देते हैं। कानून, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र, सरकारी तंत्र में काम, राजनीति, प्रशासनिक सेवा, लीडरशिप व तिकड़म से दौलत व मजबूत सामाजिक प्रतिष्ठा हासिल कर लेते हैं लेकिन इनको अहंकार से भी बचना चाहिए, क्युंकि यह इनके अचानक पतन का कारण भी बन सकता है। जन्मांक 26 के व्यक्ति पर चन्द्रमा, शुक्र व शनि का प्रभाव रहता है। यह अंक काफी विचित्र होता है। कभी बहुत खुशी महसूस होती है, कभी बहुत उदासी तो कभी किसी भी बात को लेकर अवसाद ग्रस्त रहने लगते हैं। इनको मूड स्विंगस बहुत होते हैं। रोमांस, प्रेम रस में अधिक दिलचस्पी होती है और अंतरंग बातें करने में मन लगता है। विपरित लिंग के प्रति सहज रूप से आकर्षण हो जाता है। इनका जीवन अधिकांशतः सरल, संघर्षरहित देखा जा सकता है। इनकी प्रोफेशनल लाइफ की बात करें तो यह इंजीनियरिंग, कला, मैनेजमेंट, ब्यूटी, मॉडलिंग, मैक ओवर व क्रिएटिव वर्क, डिज़ाइनर, हीलिंग, आध्यात्मिक व मनोविज्ञान जैसे कामों में सफल होते हैं।

[अगले भाग में पढ़ेंगे अंक 9 के बारे में]

ज्योतिर्विद् अशनिका शर्मा
मो- 9568962423

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