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यूपी में बदली बेसिक शिक्षा की तस्वीर: ‘स्कूल चलो अभियान’ से बढ़ा नामांकन, स्मार्ट क्लास और DBT से मजबूत हुई व्यवस्था

सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव, नामांकन, तकनीक और गुणवत्ता सुधार में दिखे ठोस परिणाम

  • समय टुडे डेस्क।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बेसिक शिक्षा व्यवस्था में पिछले वर्षों में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। ‘स्कूल चलो अभियान’ के जरिए परिषदीय विद्यालयों में नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

वर्ष 2024-25 में 13.22 लाख और 2025-26 में 15.84 लाख बच्चों का नामांकन हुआ है। वहीं, इस वर्ष अप्रैल माह में 20 दिनों के भीतर ही 8.79 लाख से अधिक नए छात्रों का नामांकन दर्ज किया गया, जो शिक्षा के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

आउट ऑफ स्कूल बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ा

सरकार द्वारा चलाए गए सर्वे अभियान के तहत वर्ष 2024-25 में 7.73 लाख आउट ऑफ स्कूल बच्चों की पहचान की गई। इनमें से 2.69 लाख बच्चों को सीधे कक्षा-1 में प्रवेश दिया गया, जबकि 5.04 लाख बच्चों को विशेष प्रशिक्षण देकर मुख्यधारा से जोड़ा गया।

DBT और मुफ्त सुविधाओं से राहत

छात्रों को आर्थिक सहायता देने के लिए DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से 1.30 करोड़ से अधिक विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, बैग और स्टेशनरी के लिए ₹1200 प्रति छात्र दिए जा रहे हैं। साथ ही कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को मुफ्त किताबें भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

‘ऑपरेशन कायाकल्प’ से बदली स्कूलों की सूरत

प्रदेश के 1.32 लाख से अधिक विद्यालयों को ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ से जोड़ा गया है। 2017-18 में जहां केवल 36% स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं थीं, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 96.30% हो गया है।

मॉडल स्कूल और आधुनिक शिक्षा पर जोर

प्रदेश में 75 जिलों में 150 मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट विद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। इन स्कूलों में प्री-प्राइमरी से कक्षा 12 तक आधुनिक सुविधाओं के साथ शिक्षा दी जाएगी।

तकनीक आधारित शिक्षा को बढ़ावा

हजारों विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और ICT लैब स्थापित की गई हैं। 2.61 लाख शिक्षकों को टैबलेट दिए गए हैं, जिससे पढ़ाई को डिजिटल और प्रभावी बनाया जा रहा है। साथ ही लाखों शिक्षकों को फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी पर प्रशिक्षण भी दिया गया है।

बालिका शिक्षा और समावेशी प्रयास

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में 87 हजार से अधिक बालिकाएं अध्ययन कर रही हैं। वहीं दिव्यांग बच्चों के लिए भी विशेष योजनाओं के तहत प्रमाण पत्र, उपकरण और छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जा रही है।

पीएम श्री और आरटीई से बढ़े अवसर

पीएम श्री योजना के तहत 1,722 विद्यालयों को विकसित किया गया है। वहीं आरटीई के अंतर्गत लाखों बच्चों को निजी स्कूलों में मुफ्त प्रवेश दिलाया गया है, जिससे शिक्षा का दायरा बढ़ा है।

पोषण और स्वास्थ्य पर भी ध्यान

पीएम पोषण योजना के तहत 1.52 करोड़ बच्चों को स्कूलों में भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। दूध और फल वितरण से बच्चों के पोषण स्तर में भी सुधार हुआ है।


‘निपुण भारत मिशन’ से गुणवत्ता में सुधार

32 हजार से अधिक स्कूल बने ‘निपुण’

बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधार के तहत ‘निपुण भारत मिशन’ का बड़ा असर देखने को मिला है। ताजा आकलन में 32,480 प्राथमिक विद्यालय ‘निपुण’ घोषित किए गए हैं, जहां कक्षा 1 और 2 के 80% से अधिक बच्चे भाषा और गणित में दक्ष पाए गए।

टॉप प्रदर्शन करने वाले जिले

निपुण रैंकिंग में हरदोई, अलीगढ़, शाहजहांपुर, महाराजगंज और खीरी जैसे जिले शीर्ष पर रहे हैं, जहां बड़ी संख्या में विद्यालयों ने मानक हासिल किए हैं।

पारदर्शी आकलन और प्रोत्साहन

डीएलएड प्रशिक्षुओं द्वारा कराए गए इस आकलन को पारदर्शी माना जा रहा है। निपुण घोषित विद्यालयों को ₹50 हजार की सहायता दी जा रही है और उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया जा रहा है।


समग्र बदलाव की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा अब केवल नामांकन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि गुणवत्ता, तकनीक और समावेश पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार की योजनाओं का प्रभाव अब जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जो प्रदेश के भविष्य को मजबूत आधार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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