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कर्मों की गूंज: जो देंगे, वही लौटेगा

बेज़ुबान जीवों की सेवा को समर्पित मंजरी शुक्ला की प्रेरक कहानी, सहयोग के लिए आगे आ सकते हैं पशु-प्रेमी

भी-कभी हमारे आसपास ऐसे लोग होते हैं, जो बिना किसी प्रचार-प्रसार और बिना किसी अपेक्षा के समाज को बेहतर बनाने में जुटे रहते हैं। ऐसी ही एक संवेदनशील और करुणामयी व्यक्तित्व हैं मंजरी शुक्ला, जिन्होंने पिछले लगभग बारह वर्षों से सड़कों पर रहने वाले बेज़ुबान पशुओं की सेवा को अपने जीवन का मिशन बना लिया है।

हर दिन वह लगभग बीस किलो चावल पकाती हैं, उसमें दूध और अंडे मिलाकर भोजन तैयार करती हैं और फिर अपनी एक्टिवा से शहर की सड़कों पर निकल पड़ती हैं। उनका इंतजार करते हैं सौ से अधिक भूखे कुत्ते, जिनके लिए मंजरी जी केवल भोजन देने वाली महिला नहीं, बल्कि एक संरक्षक और माँ के समान हैं।

उनकी सेवा केवल भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। भीषण गर्मी में पशुओं को पानी मिल सके, इसके लिए उन्होंने शहर के विभिन्न स्थानों पर साठ से अधिक पानी के बर्तन रखवाए हैं। अनेक स्थानों पर वह स्वयं जाकर उनमें पानी भरती हैं ताकि कोई भी जीव प्यासा न रहे।

मंजरी शुक्ला घायल और बीमार कुत्तों का उपचार भी करवाती हैं। वह उनके स्टरलाइजेशन की व्यवस्था करती हैं तथा दुर्घटनाग्रस्त और बीमार पशुओं को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास करती हैं। उनके घर में वर्तमान में सात ऐसे कुत्ते हैं, जिन्हें उन्होंने गंभीर परिस्थितियों से बचाकर नया जीवन दिया है। इसके अलावा गाय, बंदर और बिल्लियों सहित अनेक बेज़ुबान जीव भी उनके संरक्षण और स्नेह का लाभ पा रहे हैं।

बच्चों को दयालु बनना सिखाइए

मंजरी शुक्ला का मानना है कि समाज में संवेदनशीलता और करुणा का भाव विकसित होना आवश्यक है। उनका कहना है कि सड़क पर रहने वाले पशु भी दर्द, भूख और प्यार को उतना ही महसूस करते हैं जितना इंसान। वर्षों से सैकड़ों कुत्तों के बीच रहकर उनकी सेवा करने के बावजूद उन्हें कभी किसी पशु ने नुकसान नहीं पहुँचाया। यह प्रेम और विश्वास की शक्ति का उदाहरण है।

भारतीय संस्कृति में पहली रोटी गाय को और अंतिम रोटी कुत्ते को देने की परंपरा करुणा और सह-अस्तित्व का संदेश देती है। मंजरी शुक्ला इसी भावना को अपने जीवन में उतारते हुए निरंतर सेवा कार्य कर रही हैं।

करुणा ही इंसानियत की पहचान

जीवन का एक महत्वपूर्ण सत्य है कि हमारे कर्म किसी न किसी रूप में हमारे पास लौटकर आते हैं। हम जो करुणा, प्रेम और सहयोग दूसरों के लिए बोते हैं, वही भविष्य में हमारे जीवन को भी समृद्ध बनाते हैं।

मंजरी शुक्ला का निस्वार्थ सेवा कार्य केवल पशु-प्रेम की कहानी नहीं, बल्कि इंसानियत, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण है। उनका यह प्रयास हमें यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि समाज को बेहतर बनाने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि बड़े दिल की आवश्यकता होती है।

वास्तव में, इंसान होने का सबसे बड़ा प्रमाण हमारी ताकत नहीं, बल्कि हमारी करुणा है।

सहयोग की अपील

सैकड़ों बेज़ुबान पशुओं के लिए प्रतिदिन भोजन, पानी, दवा और उपचार की व्यवस्था करना आसान नहीं है। ऐसे में यदि कोई पशु-प्रेमी इस सेवा कार्य में सहयोग करना चाहता है, तो वह आर्थिक सहयोग भी प्रदान कर सकता है।

सहयोग हेतु यूपीआई आईडी : manjarishukla28@oksbi

मंजरी शुक्ला का कहना है कि हर महीने ₹100 या उससे अधिक का छोटा-सा योगदान भी किसी भूखे पशु के लिए भोजन, किसी घायल जीव के लिए दवा और किसी बेसहारा प्राणी के लिए सुरक्षा का माध्यम बन सकता है।

मंजरी शुक्ला का यह निस्वार्थ प्रयास केवल पशु-सेवा नहीं, बल्कि इंसानियत, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण है। वास्तव में, इंसान होने का सबसे बड़ा प्रमाण हमारी ताकत नहीं, बल्कि हमारी करुणा है।

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