पंजीकरण शुल्क ₹750 से बढ़ाकर ₹22,500 करने का विरोध, अधिवक्ता सुरक्षा कानून, बीमा, पेंशन और कैशलेस इलाज की व्यवस्था लागू करने की उठाई मांग
- हरिओम गुप्ता
कानपुर नगर। अधिवक्ता संशोधन विधेयक-2026 के विरोध में कानपुर के अधिवक्ताओं ने शताब्दी गेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान अधिवक्ताओं ने प्रस्तावित संशोधन विधेयक की प्रतियां फाड़कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और विधेयक को तत्काल वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शन का नेतृत्व लॉयर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं अधिवक्ता कल्याण संघर्ष समिति के संयोजक पं. रवीन्द्र शर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन के तहत पंजीकरण शुल्क ₹750 से बढ़ाकर ₹22,500 किया जाना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं के लिए वकालत के रास्ते बंद करने जैसा है। इससे केवल संपन्न परिवारों के लोगों को ही वकालत के क्षेत्र में आने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार अधिवक्ताओं की सुरक्षा, बीमा, पेंशन और कैशलेस चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित किए बिना संशोधन लागू करना चाहती है, जो अधिवक्ता समाज के साथ अन्याय है। उन्होंने मांग की कि एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए, अधिवक्ताओं और उनके परिवारों के लिए कैशलेस इलाज की व्यवस्था की जाए तथा वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए पेंशन योजना लागू की जाए।
प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने “संशोधन विधेयक 2026 वापस लो”, “बिना सुरक्षा, बीमा और पेंशन के संशोधन स्वीकार नहीं” जैसे नारे लगाए। पं. रवीन्द्र शर्मा ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा के नाम पर केवल आश्वासन दिए गए हैं, लेकिन उनके क्रियान्वयन की कोई स्पष्ट समयसीमा या ठोस व्यवस्था नहीं बताई गई है। ऐसे में अधिवक्ता समाज इस संशोधन विधेयक को स्वीकार नहीं करेगा और इसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रहेगा।
प्रदर्शन में कुलदीप आनंद, विजय कुमार, इशू सोनकर, भगवत प्रसाद, कुलदीप यादव, संजीव कपूर, आयुष शुक्ला, अंसार, बृजेंद्र सिंह, जितेंद्र कुमार, शिवम गंगवार, इंद्रेश मिश्रा, वीर जोशी सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।


