पांच दिवसीय प्रशिक्षण में 25 किसानों ने लिया हिस्सा, रोग प्रबंधन, संतुलित आहार और सरकारी योजनाओं की मिली जानकारी
- हरिओम गुप्ता
कानपुर नगर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, दलीप नगर में शुक्रवार को व्यावसायिक बकरी पालन विषय पर आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन, रोग प्रबंधन, संतुलित आहार तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। किसानों को बकरी पालन को स्वरोजगार और आय बढ़ाने के बेहतर माध्यम के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम के प्रशिक्षक एवं पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. शशिकांत ने कहा कि बकरी को ‘चलता-फिरता एटीएम’ और ‘गरीबों की गाय’ कहा जाता है, क्योंकि कम लागत और न्यूनतम संसाधनों में इसका पालन कर अच्छा लाभ कमाया जा सकता है। उन्होंने किसानों को संतुलित आहार प्रबंधन, वैज्ञानिक आवास व्यवस्था, विभिन्न नस्लों की पहचान तथा रोग एवं व्याधियों की रोकथाम के वैज्ञानिक उपाय बताए। इसके साथ ही पशुपालन से संबंधित विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई।
समापन अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. अजय कुमार सिंह ने कहा कि बकरी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने बकरी के दूध के पोषण एवं औषधीय गुणों की जानकारी देते हुए किसानों से बकरी पालन को व्यवसाय के रूप में अपनाने की अपील की।
वैज्ञानिक डॉ. दीपक मिश्रा ने बकरियों में होने वाले प्रमुख रोगों की समय पर पहचान और उचित प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रोगों की समय रहते पहचान कर उपचार एवं बचाव के उचित उपाय अपनाने से किसानों को होने वाले आर्थिक नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
कृषि प्रसार वैज्ञानिक डॉ. राजेश राय ने तकनीकी हस्तांतरण और पशुपालन संबंधी वैज्ञानिक जानकारी को किसानों तक पहुंचाने के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने किसानों से प्रशिक्षण में मिली तकनीकों को अपने स्तर पर अपनाने तथा अन्य पशुपालकों तक भी जानकारी पहुंचाने का आह्वान किया।
मृदा विज्ञान वैज्ञानिक डॉ. खलील खान ने बकरियों के लिए गुणवत्तापूर्ण चारा उत्पादन में मृदा परीक्षण, संतुलित उर्वरक प्रयोग एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने उद्यान फसलों के माध्यम से बकरियों के पोषण प्रबंधन से जुड़े उपयोगी सुझाव भी किसानों को दिए।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के 25 किसानों ने प्रतिभाग किया। पांच दिनों के दौरान किसानों को बकरी पालन से जुड़ी विभिन्न तकनीकी जानकारियां प्रदान की गईं, जिससे वे वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन कर अपनी आय में वृद्धि कर सकें और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकें।


