पार्क बचाओ समिति ने ऊर्जा मंत्री और केस्को एमडी से की उच्चस्तरीय जांच की मांग, पार्षद की एनओसी पर भी सवाल
- हरिओम गुप्ता
कानपुर नगर। गोविंद नगर ब्लॉक-8 स्थित सार्वजनिक पार्क को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। पार्क बचाओ समिति के अध्यक्ष प्रकाश वीर आर्य ने कानपुर विद्युत आपूर्ति कंपनी (केस्को) के अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश और शासन के नियमों की जानकारी होने के बावजूद विवादित पार्क की जमीन पर नया विद्युत कनेक्शन जारी किया गया।
इस संबंध में समिति की ओर से उत्तर प्रदेश शासन के ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा तथा केस्को के प्रबंध निदेशक को पत्र भेजकर मामले की उच्चस्तरीय विभागीय एवं सतर्कता जांच कराने की मांग की गई है।
22 अप्रैल के हाईकोर्ट आदेश के बाद भी जारी हुआ कनेक्शन
समिति अध्यक्ष के अनुसार, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रिट याचिका संख्या PIL 1023/2026 में 22 अप्रैल 2026 को गोविंद नगर ब्लॉक-8 स्थित सार्वजनिक पार्क को अतिक्रमणमुक्त कर उसके मूल हरित स्वरूप में बहाल करने का आदेश दिया था। उनका दावा है कि न्यायालय के आदेश की प्रति 12 मई 2026 को केस्को के प्रबंध निदेशक को भी उपलब्ध कराई गई थी।
आरोप है कि इसके बावजूद 6 जून 2026 को केस्को के सहायक अभियंता जय प्रकाश एवं अन्य अधिकारियों द्वारा विवादित स्थल पर शिवांग गुप्ता के नाम से नया विद्युत संयोजन स्थापित किया गया। इसके लिए मीटर संख्या G9672674 तथा खाता संख्या 7275-155-436 दर्ज होने की बात कही गई है।
पार्षद की एनओसी पर उठे सवाल
मामले में 4 अगस्त 2026 को जारी केस्को की जांच आख्या का भी हवाला दिया गया है। समिति अध्यक्ष के मुताबिक, जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि विवादित स्थल पर मंदिर होने के आधार पर क्षेत्रीय पार्षद सरोज चड्ढा द्वारा दी गई एनओसी के आधार पर विद्युत कनेक्शन जारी किया गया।
पार्क बचाओ समिति ने सवाल उठाया है कि सार्वजनिक पार्क जैसी संपत्ति के संबंध में स्वामित्व अथवा संरक्षण से जुड़ी वैधानिक अनुमति देने का अधिकार स्थानीय पार्षद के पास किस आधार पर है। समिति का आरोप है कि नगर निगम या संबंधित विकास प्राधिकरण के सक्षम अधिकारियों की अनुमति के बजाय पार्षद की एनओसी को आधार बनाकर कनेक्शन जारी करना नियमों के विपरीत है।
शिकायतकर्ता से दस्तावेज मांगने पर भी सवाल
समिति अध्यक्ष ने केस्को की जांच आख्या में शिकायतकर्ता से मालिकाना हक से संबंधित दस्तावेज मांगे जाने पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जब विद्युत कनेक्शन किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर जारी किया गया है, तो विभाग को संबंधित आवेदक से संपत्ति के वैध अधिकार से जुड़े दस्तावेज मांगने चाहिए थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया से ऐसा प्रतीत होता है कि विभागीय स्तर पर विवादित स्थल पर कब्जे को अप्रत्यक्ष संरक्षण देने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित केस्को अधिकारियों या पार्षद का पक्ष सामने नहीं आया है।
दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
पार्क बचाओ समिति ने ऊर्जा मंत्री से मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए सहायक अभियंता जय प्रकाश सहित अन्य संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय विभागीय एवं सतर्कता जांच कराने की मांग की है।
इसके साथ ही समिति ने कथित तौर पर पार्षद की एनओसी के आधार पर जारी किए गए विद्युत कनेक्शन को तत्काल निरस्त करने तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय करने की मांग की है।
समिति अध्यक्ष का कहना है कि सार्वजनिक पार्कों एवं सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए न्यायालय के आदेशों और निर्धारित नियमों का कड़ाई से पालन होना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार के अतिक्रमण या अवैध कब्जे को बढ़ावा न मिले।


