
कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता ने कहा—किसान बनें कृषि उद्यमी, आधुनिक तकनीक और उन्नत बीजों का लाभ लेकर बढ़ाएं उत्पादन; उत्कृष्ट कार्य करने वाले वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों को किया गया सम्मानित।
- हरिओम गुप्ता
कानपुर नगर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के प्रसार निदेशालय स्थित लाल बहादुर शास्त्री कृषक सभागार में शनिवार को चंद्रशेखर कृषक समिति का 42वां स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता ने कहा कि किसान देश का सम्मानित वर्ग है और राष्ट्र की प्रगति में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने किसानों से पारंपरिक खेती तक सीमित न रहकर कृषि उद्यमी बनने का आह्वान किया, ताकि वे आर्थिक रूप से स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बन सकें।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा आधुनिक कृषि तकनीकों और उन्नत बीजों को विकसित किया गया है, जिससे कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली है। उन्होंने किसानों से कृषि वैज्ञानिकों के संपर्क में रहकर कृषि संबंधी तकनीकी जानकारी लेने की अपील की, ताकि रबी फसलों में बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सके।
कुलपति ने कृषक समिति के सदस्यों को अन्य किसानों के लिए मॉडल किसान बनने की प्रेरणा दी। उन्होंने युवा किसानों से बीज उत्पादन के क्षेत्र में आगे आने और स्वरोजगार के अवसर विकसित करने का आह्वान किया। साथ ही सहफसली खेती और फूलों की खेती को अपनाने की सलाह दी।
कार्यक्रम में निदेशक प्रसार डॉ. वी.के. त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय की ओर से किसानों के हित में संचालित की जा रही विभिन्न प्रसार गतिविधियों की जानकारी दी। डॉ. पी.के. राठी ने किसानों के लिए संचालित योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया। पूर्व विधायक रघुनंदन सिंह भदौरिया और ब्लॉक प्रमुख सरसौल डॉ. विजय रत्ना तोमर ने भी किसानों को संबोधित किया।
समारोह के दौरान कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 15 कृषि वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया। इसके अलावा कृषि क्षेत्र में नवाचार और उत्कृष्ट कार्य करने वाले 15 प्रगतिशील किसानों को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया, जबकि अंत में डॉ. वी.के. कनौजिया ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। समारोह में विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रभारी एवं वैज्ञानिकों के साथ कृषि विभाग और उद्यान विभाग के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।


