
गुरुवंदन 2026 में शिक्षक-छात्र संबंधों को स्वस्थ बनाए रखने पर जोर, प्राथमिक से उच्च शिक्षा संवर्ग के 51 शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं प्रधानाचार्य सम्मानित
- हरिओम गुप्ता
कानपुर नगर। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, कानपुर संभाग के तत्वावधान में गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज सभागार में ‘गुरुवंदन 2026’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रखर चिंतक, विचारक एवं पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने शिक्षकों की सामाजिक एवं राष्ट्रीय भूमिका पर विचार व्यक्त किए।
डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि जिस प्रकार राजा का आदर्श व्यक्तित्व उपभोग शून्य स्वामित्व का होता है, उसी प्रकार शिक्षकों को भी उपभोग शून्य व्यक्तित्व का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने वर्तमान समय में शिक्षक-छात्र संबंधों को स्वस्थ बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने कहा कि शिक्षक का कार्य समाज में सर्वाधिक सम्मानपूर्ण और स्वाभिमान से जुड़ा कार्य है। शिक्षण संस्थानों में कितने भी झंझावात हों या समाज में कितने भी व्यतिक्रम उत्पन्न हों, शिक्षक को अपनी महती भूमिका का निर्वहन करना ही होगा। उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र का निर्माण शिक्षकों की जिम्मेदार भूमिका से ही संभव है।

संगठन की उपलब्धियों पर रखे विचार
कार्यक्रम के प्रधान संरक्षक डॉ. दिलीप सरदेसाई ने राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की उपलब्धियों को सामने रखते हुए संगठन की रीति-नीति और क्रियाशीलता के विषय में अपने विचार रखे।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. शैलेन्द्र द्विवेदी ने राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की गौरवशाली परंपरा पर प्रकाश डालते हुए शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं के समाधान की


