जाजमऊ थाने में दर्ज मुकदमे की जांच में कई राज्यों तक फैले नेटवर्क की जानकारी सामने आई, करीब ₹30 लाख की रकम होल्ड कराई गई, अन्य बैंक खातों और लाभार्थियों की जांच जारी।
- प्रियंका द्विवेदी
कानपुर नगर। कानपुर के जाजमऊ थाने में ₹2.66 करोड़ के इन्वेस्टमेंट फ्रॉड के मामले में पुलिस जांच के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। जांच में पता चला है कि ठगी की रकम 89 बैंक खातों में भेजी गई थी। इनमें से एक बैंक खाते में ₹25 लाख की धनराशि प्राप्त हुई थी। पुलिस अब संबंधित खातों, लाभार्थियों और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
जांच के दौरान यह जानकारी भी सामने आई कि संबंधित व्यक्ति के नाम से लगभग 35 बैंक खाते होने तथा विभिन्न राज्यों में उसके खिलाफ 38 एनसीआरपी शिकायतें और सात अभियोग दर्ज होने की जानकारी मिली है। कानपुर में इस मामले से संबंधित अब तक तीन अभियोग पंजीकृत किए जा चुके हैं। पुलिस इन मामलों के बीच संभावित संबंधों की भी पड़ताल कर रही है।
जांच में बैंकिंग सुविधाएं प्राप्त करने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है। शुरुआती जांच के अनुसार, इस नेटवर्क का विस्तार कई राज्यों तक होने की आशंका है। पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की पहचान करने और उनकी भूमिका का पता लगाने में जुटी है।

पुलिस जांच में बैंक खातों के माध्यम से हुए लेन-देन का भी पता चला है। जानकारी के मुताबिक, 5 और 8 अगस्त को दो दिनों के दौरान संबंधित खातों से लगभग ₹3.24 करोड़ का लेन-देन हुआ था। इस मामले में अब तक करीब ₹30 लाख की धनराशि होल्ड कराई जा चुकी है, जबकि शेष रकम और उसके लाभार्थियों के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है।
फिलहाल पुलिस टीम दूसरे स्तर के बैंक खातों यानी उन खातों की जांच कर रही है, जिनमें पहली बार रकम पहुंचने के बाद धनराशि आगे ट्रांसफर की गई। इसके साथ ही अन्य लाभार्थियों की पहचान करने और संदिग्ध लेन-देन की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
जांच एजेंसियां इन्वेस्टमेंट फ्रॉड के साथ एपीके (APK) फाइल के जरिए होने वाली संभावित साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट से जुड़े संभावित कनेक्शन की भी पड़ताल कर रही हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन घटनाओं के बीच कोई संबंध है या नहीं।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस का ध्यान ठगी की रकम के लेन-देन का पूरा विवरण जुटाने, संबंधित बैंक खातों के लाभार्थियों की पहचान करने और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने पर है।


