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पनकी सी ब्लॉक में भव्यता के साथ हुआ रावण दहन, जन कल्याण रामलीला समिति का 40वां वर्ष बना ऐतिहासिक

चार दशक पुरानी परंपरा के उत्सव में उमड़ा जनसैलाब, रंग-बिरंगी आतिशबाजी के बीच बुराई पर अच्छाई की जीत का दिया संदेश

  • अंकित बाजपेई

कानपुर नगर। पनकी सी ब्लॉक में जन कल्याण रामलीला प्रबंधन समिति की ओर से आयोजित रामलीला का 40वां वर्ष धूमधाम और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। दशहरे के पावन अवसर पर आयोजित मुख्य समारोह में रावण के पुतले का भव्य दहन किया गया। इस दौरान शानदार आतिशबाजी ने आसमान को रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा दिया। रावण दहन देखने के लिए पनकी सी ब्लॉक सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। पूरा क्षेत्र जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।

कार्यक्रम के दौरान रावण दहन से पहले आकर्षक आतिशबाजी का प्रदर्शन किया गया, जिसका लोगों ने भरपूर आनंद लिया। चार दशकों से निरंतर आयोजित हो रही यह रामलीला क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। आयोजन के माध्यम से लोगों को सत्य, धर्म और अच्छाई की बुराई पर विजय का संदेश दिया गया।

इस भव्य आयोजन में जन कल्याण रामलीला प्रबंधन समिति के संयोजक पवन सिंह और अध्यक्ष ललित कुमार उपाध्याय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समिति के प्रमुख सदस्यों एवं पदाधिकारियों में संतोष पाठक, एस.एन. अवस्थी, रमेश सिंह राजपूत, मुन्ना मिश्रा, जगदीश प्रसाद शर्मा, पप्पू सिंह राठौर, हरेंद्र सिंह, इंद्रजीत सिंह, आशीष सिंह, अशोक सिंह, रमेश चंद्रा और वीरेन्द्र कुमार सहित अन्य लोगों का सहयोग रहा।

कार्यक्रम में विशेष अतिथि एवं सहयोगकर्ताओं के रूप में राजीव मिश्रा (टिंकू), गुड्डू सचान, पार्षद आरती, तेजस मिश्रा (मीडिया प्रभारी, भाजपा), प्रियांक सिंह (महामंत्री, भाजपा), दीपक सिंह राजपूत, आयुष श्रीवास्तव और आदित्य तिवारी की सहभागिता रही। सुरक्षा एवं व्यवस्था के दृष्टिगत पनकी थाना प्रभारी दिनेश सिंह बिष्ट और चौकी इंचार्ज भी उपस्थित रहे।

समिति के अध्यक्ष ललित कुमार उपाध्याय ने कहा कि पनकी सी ब्लॉक में रामलीला के 40 वर्ष पूरे होना क्षेत्रवासियों के प्रेम, सहयोग और भगवान श्रीराम के आशीर्वाद का परिणाम है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ ही नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं और आदर्शों से जोड़ने का कार्य करते हैं।

जन कल्याण रामलीला प्रबंधन समिति का यह आयोजन धार्मिक आस्था, सामाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक बना। रावण दहन के साथ ही लोगों ने बुराई का त्याग कर सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

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