Home NEWS पर्यावरण संरक्षण का संदेश लेकर कानपुर पहुंची अंतरराष्ट्रीय प्रकृति पथ साइकिल यात्रा

पर्यावरण संरक्षण का संदेश लेकर कानपुर पहुंची अंतरराष्ट्रीय प्रकृति पथ साइकिल यात्रा

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नेपाल के जनकपुर धाम से शुरू हुआ 3,000 किलोमीटर का सफर, पद्मश्री एवं पद्म भूषण सम्मानित डॉ. अनिल प्रकाश जोशी कर रहे नेतृत्व; शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ने किया भव्य स्वागत

  • सौम्या पाण्डेय

कानपुर नगर। जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के साथ पर्यावरण के प्रति जन-जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से नेपाल के जनकपुर धाम से निकली अंतरराष्ट्रीय प्रकृति पथ साइकिल यात्रा रविवार को कानपुर पहुंची। यहां शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के पदाधिकारियों एवं पर्यावरण प्रेमियों ने यात्रा दल का गर्मजोशी से स्वागत किया। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर शुरू हुई यह यात्रा भारत और नेपाल के सात राज्यों से होकर लगभग 3,000 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए देहरादून पहुंचेगी।

इस ऐतिहासिक साइकिल यात्रा का नेतृत्व हिमालयी पर्यावरण अध्ययन और संरक्षण संगठन (हेस्को) के संस्थापक, प्रख्यात पर्यावरणविद् एवं पद्मश्री तथा पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित डॉ. अनिल प्रकाश जोशी स्वयं साइकिल चलाकर कर रहे हैं।

माल्यार्पण एवं पटका पहनाकर किया गया स्वागत

कानपुर आगमन पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की प्रांत संयोजिका एवं समाजसेविका डॉ. बिंदु सिंह तथा न्यास के पर्यावरण शिक्षा के प्रांत संयोजक डॉ. प्रवीण कुमार प्रजापति के नेतृत्व में यात्रा दल का नागरिक अभिनंदन किया गया। इस दौरान उपस्थित कार्यकर्ताओं ने डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, यात्रा समन्वयक रामबाबू तिवारी और अन्य यात्रियों का माल्यार्पण एवं पटका पहनाकर सम्मान किया।

स्वागत कार्यक्रम में अधिवक्ता गौरव वाजपेयी, प्रांतीय सह संयोजक (पर्यावरण), राहुल यादव, अधिवक्ता अंजलि पांडेय, प्रतिभा प्रजापति, सरदार भूपेंद्र सिंह, अजय गुप्ता सहित बड़ी संख्या में युवा एवं पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे।

प्रकृति संरक्षण के लिए युवाओं को आगे आने की जरूरत : डॉ. जोशी

स्वागत कार्यक्रम के बाद आयोजित जनसंवाद में यात्रा समन्वयक रामबाबू तिवारी ने बताया कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य देश के नीति निर्माताओं, युवाओं और आम नागरिकों का ध्यान तेजी से बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण तथा दम तोड़ती नदियों की ओर आकर्षित करना है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।

इस अवसर पर डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने युवाओं से संवाद करते हुए कहा कि ‘प्रकृति ही प्रभु है’ और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बिना मानव जीवन का अस्तित्व संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि मौसम चक्र में अप्रत्याशित बदलाव और लगातार बढ़ती प्राकृतिक आपदाएं हम सभी के लिए गंभीर चेतावनी हैं।

उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आने वाला समय देश की युवा पीढ़ी का है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण के इस महाभियान में युवाओं को आगे आकर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। जल, जंगल और जमीन की रक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।

पर्यावरण संरक्षण के लिए लिया संकल्प

जनसंवाद के दौरान उपस्थित लोगों ने डॉ. जोशी के विचारों की सराहना करते हुए पर्यावरण संरक्षण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की प्रांत संयोजिका डॉ. बिंदु सिंह ने यात्रा दल के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया और पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे इस प्रयास को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।