
दीपोत्सव के 10वें संस्करण में राम की पैड़ी पर दिखा भव्य नजारा, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी रहे मौजूद; 56 घाटों पर सजे दीपों से रोशन हुई सरयू की नगरी
- अनुराधा सिंह / दिवाकर गुप्ता
अयोध्या। प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या में शनिवार को दीपोत्सव-2026 का भव्य एवं दिव्य आयोजन किया गया। राम की पैड़ी पर आयोजित इस ऐतिहासिक समारोह में देश के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी समारोह में सहभागिता की। इस दौरान सरयू नदी के तट पर लाखों दीपों की जगमगाहट ने पूरी रामनगरी को अद्भुत आध्यात्मिक और सांस्कृतिक छटा से भर दिया।

दीपोत्सव के दसवें संस्करण को विशेष बनाने के लिए राम की पैड़ी सहित सरयू नदी के 56 घाटों पर 30 लाख से अधिक मिट्टी के दीपक सजाए गए। हजारों स्वयंसेवकों ने कई दिनों तक दीपों को व्यवस्थित तरीके से सजाने और उन्हें प्रज्वलित करने की तैयारियां कीं। शाम होते ही दीपों की रोशनी से सरयू के घाट जगमगा उठे और ऐसा प्रतीत हुआ मानो धरती पर तारों का संसार उतर आया हो। इस भव्य आयोजन ने देश-विदेश के लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने दीपोत्सव का शुभारंभ किया और सरयू तट पर आयोजित आरती में सहभागिता की। इससे पहले उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पहुंचकर प्रभु श्रीराम के दर्शन-पूजन किए। राम कथा पार्क में आयोजित कार्यक्रम में श्रीराम-जानकी की आरती और विशेष धार्मिक अनुष्ठान भी संपन्न हुए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उपराष्ट्रपति का स्वागत किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दीपोत्सव केवल दीप जलाने का आयोजन नहीं, बल्कि भारत की आस्था, संस्कृति और गौरवशाली विरासत का उत्सव है। उन्होंने अयोध्या में हो रहे विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज रामनगरी धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान के नए आयाम स्थापित कर रही है। उन्होंने विकास के साथ विरासत को संरक्षित रखने के संकल्प को भी रेखांकित किया।
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने अपने संबोधन में दीपोत्सव को जनभागीदारी, सामूहिक आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि अयोध्या में लाखों दीपों का प्रज्वलन करोड़ों भारतीयों के जीवन में आ रहे सकारात्मक बदलाव का भी प्रतीक है। उन्होंने युवाओं से रामायण के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने और आधुनिक विज्ञान, तकनीक तथा नवाचार के साथ भारतीय संस्कृति और सभ्यतागत मूल्यों से जुड़े रहने का आह्वान किया।
इस वर्ष के दीपोत्सव में आधुनिक तकनीक और पारंपरिक संस्कृति का अनूठा संगम भी देखने को मिला। रामायण के विभिन्न प्रसंगों को प्रदर्शित करने के लिए 2100 से अधिक स्वदेशी ड्रोन के माध्यम से भव्य आकाशीय प्रदर्शन किया गया। इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों, रामलीला प्रस्तुतियों, लेजर शो और संगीतमय आतिशबाजी ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ाया। देश-विदेश के कलाकारों ने भगवान श्रीराम के जीवन और रामायण से जुड़े प्रसंगों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।
दीपोत्सव के आयोजन में हजारों कलाकारों, स्वयंसेवकों, कुम्हारों, शिल्पकारों और स्थानीय नागरिकों की भागीदारी रही। उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में इस आयोजन से स्थानीय रोजगार और आजीविका को मिलने वाले अवसरों का भी उल्लेख किया। दीपों के निर्माण से जुड़े कुम्हारों, ग्रामीण महिलाओं, कलाकारों, होटल संचालकों, गाइडों और परिवहन सेवाओं से जुड़े लोगों को इससे आर्थिक गतिविधियों का लाभ मिलता है।
उल्लेखनीय है कि अयोध्या में वर्ष 2017 से दीपोत्सव की शुरुआत हुई थी। इसके बाद प्रत्येक वर्ष इस आयोजन का विस्तार हुआ और दीप प्रज्वलन के नए रिकॉर्ड स्थापित किए गए। वर्ष 2025 में दीपोत्सव के दौरान 26 लाख से अधिक दीप जलाए गए थे। इस बार दसवें संस्करण में 30 लाख से अधिक दीपों के लक्ष्य के साथ आयोजन को और भव्य स्वरूप दिया गया।

गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई ‘सगुन होहिं सुंदर सकल मन प्रसन्न सब केर। प्रभु आगवन जनाव जनु नगर रम्य चहुँ फेर॥’ के भाव को साकार करती दीपों से सजी अयोध्या में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अद्भुत वातावरण दिखाई दिया। दीपोत्सव ने एक बार फिर भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, सत्य और धर्म की विजय का संदेश दिया।
इस भव्य समारोह में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, मंत्रीगण, संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। दीपोत्सव-2026 ने अयोध्या की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का संदेश दिया।

