नेपाल में सोशल मीडिया प्रतिबंध पर हिंसा: 19 की मौत, 300 से अधिक घायल, गृह मंत्री का इस्तीफा

- समय टुडे डेस्क।
नेपाल में सरकार द्वारा सोशल मीडिया साइटों पर लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में सोमवार को बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शन हुए। राजधानी काठमांडू में युवाओं और स्कूली छात्रों ने संसद भवन के सामने प्रदर्शन किया, जिसके बाद झड़पें हुईं। पुलिस ने crowd को नियंत्रित करने के लिए पानी की बौछारें, आंसू गैस और गोलियों का इस्तेमाल किया। इस हिंसा में कम से कम 19 लोग मारे गए और 300 से अधिक घायल हुए।
घटना के बाद गृह मंत्री रमेश लेखक ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया। राजधानी और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में नेपाली सेना तैनात कर दी गई है और कर्फ्यू लागू कर दिया गया है।
अस्पतालों की स्थिति:
- नेशनल ट्रॉमा सेंटर: 8 मौतें
- एवरेस्ट अस्पताल: 3 मौतें
- सिविल अस्पताल: 3 मौतें
- काठमांडू मेडिकल कॉलेज: 2 मौतें
- त्रिभुवन टीचिंग अस्पताल: 1 मौत
कुल 347 घायल प्रदर्शनकारियों का इलाज देशभर के अस्पतालों में चल रहा है।
सरकार का रुख:
नेपाल सरकार ने 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर प्रतिबंध लगाया, क्योंकि ये निर्धारित समय सीमा के भीतर पंजीकरण में विफल रहे। सरकार का कहना है कि यह कदम कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए था, जबकि विरोधियों का मानना है कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है।
अंतरराष्ट्रीय और सीमा सुरक्षा:
नेपाल में हिंसा के बीच भारत ने नेपाल सीमा पर अलर्ट जारी कर दिया है। एसएसबी और अन्य सुरक्षा बल स्थिति पर निगरानी रख रहे हैं। भारत-नेपाल सीमा पर पर्याप्त तैनाती और चौकियों पर कड़ी जांच की गई है।
विरोध और आलोचना:
विभिन्न युवा समूहों और पत्रकारों ने सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ प्रदर्शन किया। नेपाल कंप्यूटर एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि इससे शिक्षा, व्यापार और आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कहा कि सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म के खिलाफ नहीं है, लेकिन कानून का पालन न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
नेपाल में सोशल मीडिया प्रतिबंध और हिंसा का यह संकट अब सुरक्षा बलों और प्रशासन के नियंत्रण में है, लेकिन तनाव और विरोध जारी हैं।



