प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लीडिंग: इंफेक्शन भी हो सकता है एक बड़ा कारण

गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर और मन में कई तरह के बदलाव आते हैं। अधिकांश बदलाव सामान्य होते हैं, लेकिन कभी-कभी कुछ असामान्य लक्षण भी दिखाई देते हैं। इनमें से एक है प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग, जो अक्सर महिलाओं को घबरा देती है। आमतौर पर इसे मिसकैरेज का संकेत माना जाता है, लेकिन हर बार ऐसा होना ज़रूरी नहीं है। कई बार यह समस्या कुछ इंफेक्शंस की वजह से भी हो सकती है।
किन इंफेक्शन्स से हो सकती है ब्लीडिंग?
🔹 यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI):
प्रेग्नेंसी में बढ़ते यूट्रस के दबाव से ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हो पाता। बचे हुए पेशाब में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं और संक्रमण फैला देते हैं। इससे पेशाब के मार्ग में सूजन और कभी-कभी ब्लीडिंग हो सकती है। अगर समय पर इलाज न हो, तो यह किडनी तक पहुँच सकता है।
🔹 यीस्ट इंफेक्शन:
हार्मोनल बदलाव और शरीर में शुगर लेवल बढ़ने के कारण प्रेग्नेंट महिलाओं में यीस्ट इंफेक्शन का खतरा अधिक होता है। इसमें खुजली, जलन और सूजन होती है। गंभीर स्थिति में योनि के नाजुक टिश्यूज़ से खून भी निकल सकता है।
🔹 क्लैमाइडिया (Sexually Transmitted Infection):
यह एक यौन संचारित रोग है, जो सर्विक्स में सूजन पैदा करता है। इसके कारण गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) इतना संवेदनशील हो जाता है कि मामूली छूने या शारीरिक संबंध बनाने के बाद भी खून निकल सकता है। यदि समय पर इलाज न मिले, तो यह शिशु के लिए भी खतरनाक हो सकता है।
क्यों ज़रूरी है सतर्कता?
गर्भावस्था के दौरान सर्विक्स और योनि में रक्त की नलिकाएं अधिक संवेदनशील हो जाती हैं। ऐसे में हल्की सी जलन, रगड़ या दबाव से भी स्पॉटिंग हो सकती है। खासकर, इंफेक्शन के दौरान ब्लीडिंग का खतरा और बढ़ जाता है।
क्या करें अगर प्रेग्नेंसी में ब्लीडिंग हो?
- घबराएं नहीं, क्योंकि हर बार इसका मतलब मिसकैरेज नहीं होता।
- तुरंत गायनेकोलॉजिस्ट से संपर्क करें।
- शरीर में हो रहे छोटे-छोटे बदलावों पर ध्यान दें।
- स्वच्छता और डॉक्टर की सलाह का पालन करें।
👉 याद रखें, समय पर जांच और इलाज से मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।



